
नीट छात्रा की आत्महत्या के लिए धर्मेंद्र प्रधान जिम्मेदार, तत्काल दें इस्तीफा, 1 करोड़ मुआवजे की मांग: किसान संगठन
आजमगढ़, 19 जुलाई 2026। आजमगढ़ में नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा सृष्टि की आत्महत्या के बाद छात्र-युवाओं और किसान संगठनों में भारी आक्रोश है। सोशलिस्ट किसान सभा और पूर्वांचल किसान यूनियन ने इस दुखद घटना के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए उनके तत्काल इस्तीफे और एनटीए (NTA) को तत्काल भंग करने की मांग की है। किसान संगठनों ने पीड़ित परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की भी मांग उठाई है।
भ्रष्ट व संवेदनहीन व्यवस्था ले रही नौनिहालों की जान
किसान नेता राजीव यादव और वीरेंद्र यादव ने संयुक्त बयान जारी कर कहा:
”नीट छात्रों की आत्महत्या की आग अब हमारे शहर आजमगढ़ तक पहुंच गई है। यह सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि देश की भ्रष्ट और संवेदनहीन परीक्षा व्यवस्था द्वारा छात्रों के विश्वास की सामूहिक हत्या है। इस लचर व्यवस्था के कारण पैदा हुआ अविश्वास हमारे बच्चों को फंदे पर झूलने और नौनिहालों की लाशों को कफन में लपेटने को मजबूर कर रहा है।”
नेताओं ने बताया कि 18-19 साल की छात्रा सृष्टि ने कुछ कर गुजरने की चाहत में नीट की परीक्षा दी थी। पहली बार पेपर लीक होने और दोबारा परीक्षा के मानसिक तनाव ने उसकी जान ले ली। छात्रा के पिता की मौत पहले ही हो चुकी थी और अब इकलौती बेटी की मौत से पूरा परिवार गहरे सदमे में है।
पीड़ित परिवार से मिले किसान नेता
घटना के बाद किसान नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल सिविल लाइंस स्थित मृतका के आवास पर पहुंचा, जिसमें अधिवक्ता विनोद यादव और अवधेश यादव शामिल रहे। वहां नेताओं ने छात्रा के मामा से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। शोकाकुल परिवार ने कहा कि वे इस घटना से बेहद आहत हैं और स्थिति सामान्य होने पर आगे की बात करेंगे।
आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी
किसान नेताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एक तरफ आइसा (AISA) की नेहा और मनीष समेत कई छात्र शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे आंदोलनकारियों की मांग न मानकर सोनम वांगचुक का दिनदहाड़े देश की राजधानी में सफेद चादर से ढककर अपहरण कर रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह देश के किसानों-मजदूरों के बेटा-बेटी की जिंदगी बचाने की लड़ाई है, जिसे अंतिम सांस तक लड़ा जाएगा।


