वैश्विक शोध क्षेत्र में केयू ने स्थापित किए नए आयाम : प्रो. सोमनाथ सचदेवा

केयू वैज्ञानिकों की भूकंपीय खतरे संबंधी भारत-इटली अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना में अहम भागेदारी।
परियोजना में केयू हरियाणा एवं उत्तर भारत का एकमात्र विश्वविद्यालय।

कुरुक्षेत्र (अमित)23 दिसम्बर : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि वैश्विक शोध एवं अनुसंधान के क्षेत्र में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने नए आयाम स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में केयू भूभौतिकी वैज्ञानिकों की टीम को भूकंपीय खतरे संबंधी भारत-इटली अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना मिलना बडे़ गर्व का विषय है जो केयू की वैश्विक शोध एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता, उत्कृष्टता एवं प्रतिबद्धता को दर्शाता है। गौरतलब है कि भूकंपीय खतरे के आंकलन को लेकर प्रतिष्ठित भारत-इटली संयुक्त विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की योजना के तहत केयू भूभौतिकी विभाग के वैज्ञानिकों की टीम को मई 2025 में अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना मिली। इस उपलब्धि के लिए कुवि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने भूभौतिकी विभाग के वैज्ञानिक शिक्षकों की टीम को बधाई भी दी।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की ओर से शोध दल में शामिल भूभौतिकी विभाग के शिक्षक डॉ. आरबीएस यादव (प्रमुख अन्वेषक) और डॉ. मनीषा संधू (सह-प्रमुख अन्वेषक) ने बताया कि भूकंपीय खतरे संबंधी भारत-इटली अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना में केयू हरियाणा एवं उत्तर भारत का एकमात्र विश्वविद्यालय है। वहीं इस शोध परियोजना का चयन वैज्ञानिक योग्यता, राष्ट्रीय प्राथमिकता और परियोजना समन्वयकों की विशेषज्ञता के आधार पर किया गया था। हैं। इस अंतरराष्ट्रीय परियोजना का उद्देश्य भारतीय और इतालवी वैज्ञानिकों के बीच आपसी यात्राओं और संयुक्त अनुसंधान के माध्यम से वैज्ञानिक ज्ञान के आदान-प्रदान और उन्नत तकनीकों के विकास को बढ़ावा देना है। भारत-इटली संयुक्त विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग कार्यक्रम की ‘शोधकर्ताओं के आदान- प्रदान’ योजना के तहत प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा वित्त पोषित है। वहीं शोध दल में भूभौतिकी विभाग के शिक्षक डॉ. आरबीएस यादव (प्रमुख अन्वेषक) व डॉ. मनीषा संधू (सह-प्रमुख अन्वेषक) के साथ राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस), नई दिल्ली के डॉ. एपी सिंह और सीएसआईआर- एनईआईएसटी, असम के डॉ. शांतनु बरुआ शामिल है।
परियोजना का उद्देश्य समय-निर्भर भूकंपीय खतरा मॉडल विकसित करना।
प्रमुख अन्वेषक डॉ. आरबीएस यादव ने बताया कि इस परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य भारत के भूकंपीय क्षेत्र चतुर्थ के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (एनसीआर) के लिए विश्वसनीय, समय-निर्भर भूकंपीय खतरा मॉडल विकसित करना है ताकि शोध के माध्यम से भूकंप के जोखिम को कम कर भूकंपीय प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे को विकसित किया जा सके।

VV NEWS

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