
नि:क्षय पोषण योजना का लाभ समय से दिलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग सक्रिय, घर-घर पहुंचकर किया जाएगा सत्यापन
जनपद के क्षय रोग (टीबी) से पीड़ित मरीजों को सरकार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता समय से और बिना किसी बाधा के मिलती रहे, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष सत्यापन अभियान शुरू किया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन. आर. वर्मा ने बताया कि भारत सरकार के निर्देशानुसार अब नि:क्षय पोर्टल पर पंजीकृत टीबी मरीजों की पहचान का सत्यापन तथा उनकी आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (आभा) संख्या का निर्माण अथवा सत्यापन कराया जा रहा है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंच सके।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि नि:क्षय पोषण योजना के अंतर्गत उपचाराधीन टीबी मरीजों को पोषण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है। इस सहायता राशि के भुगतान में किसी प्रकार की समस्या न आए, इसके लिए लाभार्थियों की पहचान का डिजिटल सत्यापन कराया जाना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि सत्यापन की प्रक्रिया में मरीज के आधार कार्ड में उपलब्ध विवरण का मिलान उसके चेहरे की पहचान से किया जाता है। इस प्रक्रिया को चेहरा आधारित सत्यापन (फेस ऑथेंटिकेशन) कहा जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ वास्तविक पात्र मरीज को ही प्राप्त हो।
डॉ. वर्मा ने बताया कि प्रत्येक मरीज की आभा संख्या (आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता) भी बनाई अथवा सत्यापित की जाएगी। यह एक विशिष्ट स्वास्थ्य पहचान संख्या है, जिसके माध्यम से व्यक्ति के स्वास्थ्य संबंधी अभिलेख सुरक्षित रूप से डिजिटल माध्यम में उपलब्ध रहते हैं और विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्राप्त करने में सुविधा होती है।
अभियान को सफल बनाने के लिए जनपद के सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सीएचओ अपने क्षेत्र में आशा, एएनएम एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सहयोग से प्रत्येक टीबी मरीज तक पहुंचेंगे तथा उनका सत्यापन, आभा संख्या निर्माण, उपचार संबंधी अनुश्रवण एवं फॉलोअप सुनिश्चित करेंगे। जिन क्षेत्रों में सीएचओ तैनात नहीं हैं, वहां यह कार्य क्षय रोग कार्यक्रम से जुड़े स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा किया जाएगा।
इस संबंध में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. वी. पी. सिंह ने बताया कि जनपद में उपचाराधीन सभी टीबी मरीजों का शत-प्रतिशत सत्यापन कराया जाना लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि कई बार आधार से बैंक खाता न जुड़े होने अथवा पहचान संबंधी तकनीकी त्रुटियों के कारण लाभार्थियों को मिलने वाली सहायता राशि बाधित हो जाती है। इस अभियान के माध्यम से ऐसी सभी समस्याओं का समय रहते समाधान किया जाएगा। उन्होंने टीबी मरीजों एवं उनके परिजनों से अपील की कि स्वास्थ्य विभाग की टीम को आवश्यक सहयोग प्रदान करें तथा मांगे जाने पर आधार कार्ड, बैंक खाते का विवरण एवं अन्य आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराएं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने सभी टीबी मरीजों एवं उनके परिजनों से अपील की है कि वे यह सुनिश्चित कर लें कि उनका बैंक खाता आधार संख्या से जुड़ा हुआ है। यदि बैंक खाता आधार से लिंक नहीं होगा तो आर्थिक सहायता की धनराशि मिलने में कठिनाई आ सकती है। इसके लिए लाभार्थी अपने निकटतम जनसेवा केंद्र अथवा बैंक शाखा से संपर्क कर सकते हैं।
डॉ. वर्मा ने जिला एवं ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने नियमित भ्रमण के दौरान अभियान की नियमित समीक्षा एवं निगरानी भी अवश्य करें , जिससे जनपद के सभी पात्र टीबी मरीजों का सत्यापन समय से पूरा हो सके और किसी भी लाभार्थी की पोषण सहायता राशि बाधित न हो।
उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन की दिशा में यह अभियान महत्वपूर्ण कदम है और सभी स्वास्थ्य कर्मियों को इसे प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
(डॉ. एन. आर. वर्मा)
मुख्य चिकित्सा अधिकारी
आजमगढ़

