
शोध एवं विकास पर शनिवार को ट्रांजिट कैंपस में हुआ कार्यशाला का आयोजन।
पलवल, प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 18 अप्रैल : श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय में शनिवार को शोध एवं विकास पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में शोध के विभिन्न आयामों पर विचार-मंथन किया गया। सैप के सीईओ विकास सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यशाला का उद्धाटन किया। ट्रांजिट कैंपस की निदेशक प्रोफेसर सुजाता शाही ने उनका स्वागत किया। मुख्य अतिथि विकास सिंह ने उद्योग एवं अकादमिक क्षेत्र के बीच समन्वय, नवाचार आधारित तथा व्यावहारिक शोध की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि शोध उद्योग की जटिलताओं और चुनौतियों को दूर करेगा तो उसकी प्रासंगिकता और बढ़ जाएगी। विकास सिंह ने शोधार्थियों से शोध को अधिक कारगर और उपयोगी बनाने का आह्वान किया।
विशिष्ट वक्ता के रूप में रेखा बोहरा एवं डॉ. सौम्या ने शोध के क्षेत्र में करियर निर्माण और प्रभावी शोध कार्य के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।
कार्यशाला के विभिन्न तकनीकी सत्रों में शोध के मूलभूत सिद्धांतों से लेकर उन्नत तकनीकों तक पर चर्चा की गई। प्रथम सत्र में प्रोफेसर आरके ठाकुर ने शोध की आधारभूत समझ पर व्याख्यान दिया। इसके पश्चात प्रोफेसर पुष्पेंद्र कुमार ने शोध पद्धति की तकनीकों को विस्तार से समझाया। तृतीय सत्र में डॉ. सपना ने शोध के व्यावहारिक पक्षों पर प्रकाश डाला। अंतिम सत्र ओपीजेएस विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ. पतंजल कुमार द्वारा लिया गया, जिसमें प्रभावी शोध प्रस्तुति एवं प्रकाशन पर चर्चा की गई।
ट्रांजिट कैंपस की निदेशक प्रोफेसर सुजाता शाही ने शोध के सैद्धांतिक पक्षों पर प्रकाश डालते हुए शोधार्थियों को प्रेरित किया। प्रोफेसर शाही ने कहा श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय उद्योग की चुनौतियों पर शोध करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर प्रबंधन संकाय के अधिष्ठाता प्रोफ़ेसर एसके सिन्हा ने शोध की प्रासंगिकताओं पर चर्चा की।
डॉ. विवेक बाल्यान ने आयोजन सचिव के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जबकि डॉ. समर्थ सिंह, निदेशक (शोध एवं विकास) ने शैक्षणिक समन्वय किया। कार्यशाला में डॉ. रबचा, डॉ. गुरदीप, इरा की निदेशक चंचल भारद्वाज और डॉ. गुरप्रीत डांडीवाल की विशेष भूमिका रही। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों,शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।


