
धार्मिक और पर्यावरणीय चेतना का संगम: महादेव गौशाला में स्थापित होगी ‘नक्षत्र वाटिका’ : अशोक रोशा
थानेसर,प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 7 जून : नकुल शाखा पुरुषोत्तम मास रविवार गौ सेवा संकल्प के अंतर्गत एक अत्यंत सराहनीय और सनातन परंपरा को समृद्ध करने वाले कार्य का शुभारंभ होने जा रहा है। इसके तहत ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व के केंद्र महादेव गौशाला में रविवार 14 जून’ को नक्षत्र वाटिका’ की स्थापना की जाएगी। गौशाला प्रबंधन और नकुल शाखा के सेवादारों के अनुसार, इस वाटिका के निर्माण से न केवल पर्यावरण का संरक्षण होगा, बल्कि इस पावन तीर्थ की दिव्यता में भी अलौकिक वृद्धि होगी।
जिस स्थान पर यह नक्षत्र वाटिका लगाई जा रही है, उसका इतिहास अत्यंत गौरवशाली और अनादि है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महादेव गौशाला जगतपिता ब्रह्मा जी की उत्पत्ति स्थल ‘नाभीकमल तीर्थ’ पर स्थित है।
पुराणों और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, सृष्टि की रचना के समय भगवान विष्णु की नाभि से एक कमल प्रकट हुआ था, जिससे ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई। इसी कारण इस स्थान को ‘नाभीकमल तीर्थ’ कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, उत्पत्ति के पश्चात ब्रह्मा जी ने अपनी तपस्या और सृष्टि के कल्याण के लिए इसी पावन भूमि पर शिवलिंग की स्थापना की थी। तब से यह स्थान हरि (विष्णु) और हर (शिव) की साक्षात कृपा का केंद्र बना हुआ है।
सनातन संस्कृति और ज्योतिष शास्त्र में पेड़-पौधों का संबंध सीधे तौर पर आकाशमंडल के नक्षत्रों से जोड़ा गया है। नक्षत्र वाटिका में 27 नक्षत्रों से संबंधित 27 विशेष औषधीय और पूजनीय पौधे लगाए जाएंगे।
मान्यता है कि नक्षत्र वाटिका की परिक्रमा और दर्शन करने से कुंडली के नक्षत्र दोष दूर होते हैं।
पुराणों के अनुसार, जहाँ गौ सेवा और नक्षत्र पौधों का वास एक साथ होता है, वह स्थान साक्षात देवलोक के समान पूजनीय हो जाता है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य: ये पौधे वातावरण को शुद्ध करने के साथ-साथ प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
पुण्य काल में अनूठा संकल्प।
पुरुषोत्तम मास (मलमास) को सनातन धर्म में सर्वोत्तम और पुण्य फलदाई माना गया है। इस पवित्र महीने के रविवार को गौ सेवा संकल्प के तहत इस कार्य की रूपरेखा तैयार की गई है। महादेव गौशाला में आने वाले श्रद्धालु अब न केवल साक्षात कामधेनु स्वरूपा गायों की सेवा कर सकेंगे, बल्कि नक्षत्र वाटिका के माध्यम से प्रकृति और परमात्मा से भी सीधे जुड़ सकेंगे।
स्थानीय श्रद्धालुओं और संतों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा है कि नाभीकमल तीर्थ पर इस वाटिका की स्थापना से इस पौराणिक स्थल का गौरव और अधिक बढ़ेगा और यह आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था और पर्यावरण चेतना का एक बड़ा केंद्र बनेगा।


