सांसद नवीन जिन्दल के प्रयासों से कुरुक्षेत्र में पहले हरित शवदाह गृह का सफल ट्रायल

सांसद नवीन जिन्दल की पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल।

कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 29 अप्रैल : सांसद नवीन जिन्दल की प्रेरणा और पहल पर कुरुक्षेत्र के पहले हरित शवदाह गृह का आज सफल परीक्षण (ट्रायल) किया गया। कुरुक्षेत्र के सैक्टर 5 के वार्ड नंबर 12 में स्थित यह पहल पर्यावरण संरक्षण, लकड़ी की बचत और आधुनिक तकनीक के माध्यम से अंतिम संस्कार को प्रदूषणमुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
हरित शवदाह गृह के विशेष चैंबर का निर्माण कराने वाले सिरसा के रामजी जयमल ने उपस्थित गणमान्य लोगों को हरित शवदाह गृह की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सामान्य तौर अंतिम संस्कार में चार से पांच क्विंटल लकड़ी प्रयोग होती है जबकि हरित शवदाह गृह में मात्र 80 किलो लकड़ी से ही संस्कार संपन्न हो जाता है। यह तकनीक पिछले लगभग 20 वर्षों से हरियाणा के सिरसा, फतेहाबाद तथा पंजाब के कई क्षेत्रों में सफलतापूर्वक अपनाई जा रही है।
रामजी जयमल ने जानकारी देते हुए बताया कि इस हरित शवदाह गृह के प्रयोग में लाने से लकड़ी की भारी बचत होती है। उन्होंने बताया कि लोहे से बने रैक पर लकड़ी का रखरखाव, इस प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें सिर और छाती के भाग पर अधिक लकड़ी रखी जाती है तथा शव के ऊपर लगभग 10 किलोग्राम लकड़ी रखी जाती है।
उन्होंने बताया कि इस चैंबर में ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए विशेष खिड़कियों की व्यवस्था की गई है, जबकि अन्य क्रिया के लिए अलग से स्थान निर्धारित है। चिमनी के माध्यम से धुआं बाहर निकलता है, जिससे प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है। इस हरित शवदाह गृह में, संस्कार करने में लगभग 45 मिनट का समय लगता है। आज ट्रायल के दौरान लोगों की उपस्थिति में 80 किलोग्राम लकड़ी को तोलकर चैंबर में रखा गया और शवदाह क्रिया का सफल प्रदर्शन (डेमो) किया गया। रामजी जयमल ने यह भी बताया कि विशेष परिस्थितियों जैसे पानी में डूबे या जहर खाए हुए शव में अतिरिक्त लकड़ी की आवश्यकता पड़ सकती है।
उन्होंने कहा कि शुरुआत में लोग इस तकनीक को अपनाने में झिझकते हैं, लेकिन समय के साथ जागरूकता बढ़ने पर इसे व्यापक रूप से स्वीकार किया जाएगा, जैसा कि हरियाणा के अन्य क्षेत्रों में देखा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि यह चैंबर मूल रूप से वर्ष 1998 में डिजाइन किया गया था और अब इसे आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप उपयोग में लाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सिरसा क्षेत्र में नागरिकों ने स्वयं धन एकत्रित कर ऐसे प्रकल्पों को सफल बनाया है। उन्होंने विश्वास जताया कि सांसद नवीन जिन्दल के प्रयासों से कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र में भी, इस पहल को सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिलेगी।
इस अवसर पर सांसद कार्यालय प्रभारी धर्मवीर सिंह ने कहा कि सांसद नवीन जिन्दल की यह पहल पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों की बचत और समाज में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस मॉडल के सफल क्रियान्वयन के बाद भविष्य में ऐसे और हरित शवदाह गृह स्थापित कराऐ जाएंगे।
इस अवसर पर दरबारा सिंह सैनी पार्षद, दुष्यंत बख्शी पार्षद, महेंद्र पाल मेहता पार्षद प्रतिनिधि, जोगेंद्र सिंह चौहान मंदिर प्रधान, सेक्टर-3, दलसिंह मल्लाह, ऋषि प्रकाश गुप्ता, हुकुमचंद, भरपूर सिंह, मनजीत सिंह, समयपाल सिंह, भूषण मंगला, बलविंद्र सिंह, राजेंद्र राजपूत, नवीन जिन्दल फाउंडेशन की टीम और अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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