
दीपक शर्मा (जिला संवाददाता )
बरेली : हिन्दू जागृति मंच ने महाराणा प्रताप की जयंती मना कर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए माल्यार्पण किया और विचार व्यक्त किए। कोट पूर्वी स्थित शलभ रस्तोगी के प्रतिष्ठान पर हिंदू जागृति मंच की ओर से महाराणा प्रताप जयंती पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें हर्षित शर्मा हनी ने महाराणा प्रताप को समर्पित राष्ट्रभक्ति गीत सुनाया। सुभाष चंद्र शर्मा ने कहा कि मेवाड़ के सूर्य के रूप में 9 मई 1540 को राजस्थान के कुंभलगढ़ में महाराणा प्रताप ने जन्म लेकर 1576 में अकबर के विरुद्ध हल्दीघाटी का युद्ध लड़कर अपनी सेना के साथ अकबर की सेना को टक्कर दी। युद्ध में कहीं साहस नहीं छोड़ा। 25 वर्ष जंगल में रहकर घास की रोटी खाई। इस बीच अकबर ने 40 बार संधि का प्रस्ताव भेजा। लेकिन महाराणा प्रताप ने ठुकरा दिया। संगीतकार एवं प्रसिद्ध कवि श्रीपाल शर्मा ने महाराणा प्रताप के आकर्षक व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके घोड़े चेतक की वीरता, संघर्ष, स्वामी भक्ति को रेखांकित किया। महाराणा प्रताप को वीरता, त्याग, संघर्ष, स्वाभिमान का पर्याय बताकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। हिंदू जागृति मंच के प्रदेश महामंत्री सुबोध कुमार गुप्ता ने कहा कि स्वामीभक्त झाला मानसिंह ने अपने प्राण देकर महाराणा प्रताप के प्राणों की रक्षा की। महाराणा प्रताप हिंदू एकता को समर्पित थे। ऐसे महाराणा प्रताप के बताए मार्ग पर हम सब चलें, तभी राष्ट्र धर्म जीवंत हो सकता है। विचार गोष्ठी में राजेंद्र सिंह गुर्जर, भरत शर्मा, अजय कुमार शर्मा, अमित गुप्ता आदि अनेक वक्ताओं ने विचार व्यक्त करके महाराणा प्रताप की 486 वीं जयंती मनाई। विचार गोष्ठी से पूर्व सभी कार्यकर्ताओं ने महाराणा प्रताप के चित्र पर माल्यार्पण करके दीप प्रज्वलित किया। विचार गोष्ठी की अध्यक्षता अरुण अग्रवाल ने की संचालन शलभ रस्तोगी ने किया।


