विष्णु पुराण समस्त शास्त्रों में श्रेष्ठ एवं परम पुरुषार्थ को देने वाला है – आचार्य श्री ज्ञानचन्द्र द्विवेदी

विष्णु पुराण समस्त शास्त्रों में श्रेष्ठ एवं परम पुरुषार्थ को देने वाला है। आचार्य श्री ज्ञानचन्द्र दृवेदी

भारतीय इतिहास, राजनीतिक, धार्मिक परंपराओं को पूर्ण रूप से समझने के लिए पुराणों का अध्ययन अनुशीलन एवं श्रवण अति आवश्यक है।
पुराण ज्ञान-विज्ञान के अपरिमित कोष हैं।
वेदों में प्रतीक रूप से तथ्यों को उपस्थित किया गया है उनको समझने में सामान्य जनमानस को थोड़ी कठिनता होती है पर पुराणों में उन्हीं तथ्यों को ससंदर्भ व्याख्या करते हुए जनमानस के लिए बोधगम्य बनाया गया है।
वैदिक तत्वों को प्रकट करने के लिए ही पुराण वांग्मय का आविर्भाव हुआ है।
व्यास जी एवं उनके शिष्यों प्रशिष्यों ने उपनिषदों में वर्णित नाम ,रूप, भाव से परे ब्रह्म को पुराणों में सर्वनामी,सर्वरूपी सर्वभावमय रूप में अंकित कर भगवान के रूप को सर्वजन ग्राह्य बताया है।
पुराणों में विभिन्न नाम और रूपों से युक्त सर्वशक्तिमान, शरणागत, दुखत्राता, अभीष्ट इच्छाओं को पूर्ण करने वाले विपत्ति के समय भक्त के पास दौड़कर आने वाले भगवान का रूप अंकित किया गया है। विष्णु पुराण समस्त पापों को नष्ट करके समस्त पुरुषार्थों को देने वाला है विष्णु पुराण के कथाक्रम में आगे एक विशेष चर्चा यह आई कि भगवान ही ब्रह्मा विष्णु महेश बना करके सृष्टि की रचना सृष्टि का पालन एवं सृष्टि का संहार करते हैं।
विश्व का सबसे बड़ा सिद्धांत यह है कि इस संसार में भगवान के अलावा कोई दूसरा तत्व नहीं है।
व्यास पीठ से वाराह अवतार की कथा एवं समुद्र मंथन की कथा को बड़े ही मनोरम तरीके से श्रोताओं ने श्रवण किया।

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