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गुरु ही सच्चा मार्ग दिखाता है : समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया

वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक

कुरुक्षेत्र : समर्थगुरु धाम हिमाचल के जोनल कॉर्डिनेटर और श्री दुर्गा देवी मंदिर पिपली (कुरुक्षेत्र) के पीठाधीश ज्योतिष व वास्तु आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि पंचांग के अनुसार सनातन धर्म में सभी तिथि का विशेष महत्व है। वहीं आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि के दिन गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। 10 जुलाई 2025 गुरुवार, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र, धनु राशि के चंद्रमा , ऐंद्र योग में गुरु पूर्णिमा है। इस तिथि के दिन महाभारत के रचयिता ऋषि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है।
गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा और वेद पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन गुरु और शिष्य के बीच के पवित्र बंधन का सम्मान करने का अवसर है।
इस दिन लोग अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। गुरु पूर्णिमा भगवान वेद व्यास के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। वेद व्यास को महाभारत, पुराणों, वेद, उपनिषदों और अनेक अन्य हिन्दू ग्रंथों का रचयिता माना जाता है। उन्हें ज्ञान, पवित्रता और आत्मज्ञान का प्रतीक माना जाता है।
समर्थगुरु धाम मुरथल, हरियाणा के मुख्य संस्थापक समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया कहते है कि समर्थगुरु उसे कहते है जिसको आत्मा और परमात्मा का निजी अनुभव हो और अपने शिष्य को भी अनुभव कराने की समर्थ रखता हो और ओंकार से जोड़ता है।
गुरु बिनु मारग कौन दिखावै। अर्थात् गुरु के बिना आध्यात्मिक पथ कौन दिखा सकता है।
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सभी साधकों को प्रेम और आशीष प्रदान किए।

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