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विश्व के कल्याण की बात करती है हमारी संस्कृति : महीपाल ढांडा

स्वामी विवेकानंद के जीवन से प्रेरणा लें युवाः श्री सतीश
कौशल परक शिक्षा से स्वावलंबी भारत का निर्माण करेंगे : प्रो. सोमनाथ सचदेवा।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस, स्वामी विवेकानंद जी जयंती, राष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष्य में हवन यज्ञ व स्वदेशी संकल्प दौड़ आयोजित।

कुरुक्षेत्र, (प्रमोद कौशिक) 9 जनवरी : कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (कुवि) केे स्थापना दिवस पर एवं स्वामी विवेकानंद जयंती-राष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष्य में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम (क्रश हॉल) में हवन यज्ञ के आयोजन के साथ स्वदेशी संकल्प दौड़ का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा, स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संगठक सतीश, कुवि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा व उनकी धर्मपत्नी डॉ. ममता सचदेवा और कुलसचिव लेफ्टिनेंट प्रो. वीरेन्द्र पाल सहित सभी शिक्षकों ने हवन यज्ञ में आहुति डालकर विश्वविद्यालय परिवार की सुख-समृद्धि और संस्थान की शैक्षणिक ऊंचाइयों के लिए मंगल कामना की। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय पूर्व छात्र गोपी मलिक व नरेश नैन को स्वयं का व्यवसाय शुरू करके सफल उद्यमी बनने सम्मानित किया। इसके साथ-साथ कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के भवनों का नामकरण देश के महापुरुषों के नाम पर करने वाली कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय भवन स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने कहा कि संस्कारों से बड़ी कोई वसीयत नहीं होती और यह संस्कार शिक्षा व ज्ञान पर ही निर्भर करते हैं। उन्होंने कहा कि हमें उन देशों का अनुसरण नहीं करना चाहिए जो केवल अपने स्वार्थ सिद्ध करने में लगे हैं। भारत की सोच कभी भी अपने हित के लिए विश्व में उथल-पुथल मचाने की नहीं रही है। शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज संवेदनाएं समाप्त होती जा रही हैं और मानवता के कल्याण का अर्थ कहीं खोता नजर आ रहा है। ऐसे में हम सभी का दायित्व बनता है कि हम अपनी जिम्मेदारियों को समझें। उन्होंने कहा कि आज के छात्र की भूमिका क्या है, इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है और युवाओं को अपने देश की विचारधारा को समझना होगा।
उन्होंने गर्व के साथ कहा कि भारत की संस्कृति अत्यंत उन्नत रही है और हमारा लक्ष्य केवल स्वयं का नहीं, बल्कि “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना के साथ विश्व कल्याण का है। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत कभी भी महाशक्ति बनने के नाम पर मानवता का नाश नहीं करता, जबकि आज पूरी दुनिया युद्ध की ओर बढ़ती दिख रही है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित और शक्तिशाली राष्ट्र बनाया जाएगा, जहां युवा रोजगार मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बनेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्तमान पीढ़ी पर देश को गर्व है और 2037 तक भारतीय युवा हर क्षेत्र में देश का नाम रोशन करेंगे, वहीं 2047 में भारत दुनिया को मार्गदर्शन देने की भूमिका में होगा।
स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संगठक सतीश ने स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़े प्रसंगों को बताते हुए युवाओं को स्वामी विवेकानंद के जीवन से प्रेरणा लेकर जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यह संयोग का विषय है कि देश के 1167 विश्वविद्यालयों में होने वाले इस राष्ट्रीय आयोजन की शुरुआत सबसे पहले कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से हो रही है, जिसमें देशभर के लगभग 5.5 लाख महाविद्यालय सहभागी बन रहे हैं।
सतीश जी ने अपने संबोधन में स्वामी विवेकानंद जी जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि मात्र 39 वर्ष के जीवनकाल में उन्होंने पूरी दुनिया को भारतीय संस्कृति और चेतना से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि 1893 में शिकागो धर्म संसद में मात्र 30 वर्ष की आयु में दिए गए विवेकानंद जी के ऐतिहासिक भाषण ने भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई।
उन्होंने कहा कि सफलता का मूल मंत्र एकाग्रता है, और स्वामी विवेकानंद का संपूर्ण जीवन इसी विचार का प्रतीक है। सतीश जी ने जोर देकर कहा कि स्वदेशी और स्वावलंबन विकसित भारत की आधारशिला हैं। “इच्छा से देसी, आवश्यकता से स्वदेशी और मजबूरी में विदेशी लेकिन हमें इस मजबूरी को धीरे-धीरे समाप्त करने का संकल्प लेना होगा।
सतीश ने कहा कि यह भारत उदय का समय है। अब देश को केवल अनुसरण नहीं, बल्कि विश्व का नेतृत्व करना है। इसके लिए हर नागरिक को स्वदेशी अपनाने और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को जीवन में उतारना होगा।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय से आरंभ हुआ कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय आज शिक्षा के क्षेत्र में पूरे देश में सभी विश्वविद्यालयों के लिए प्रेरणास्रोत है क्योंकि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध, संस्कृति, खेल के क्षेत्र में अग्रणी विश्वविद्यालयों में शामिल है। पूरे देश में सबसे पहले राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सभी प्रावधानों के साथ लागू करने वाला पहला विश्वविद्यालय है। विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र समाज के अंदर प्रतिष्ठित स्थानों पर कार्य कर रहे हैं। हम केवल डिग्री देने वाला संस्थान नहीं रहना चाहते, बल्कि हम एक ऐसी पीढ़ी तैयार कर रहे हैं जो स्किल और विल दोनों में श्रेष्ठ हो। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी उच्च विरासत से प्रेरणा लेें इसके लिए हमने विश्वविद्यालय के सभी भवनों का नामकरण महापुरुषों के नाम पर किया है। विश्वविद्यालय ने अपने स्थापना दिवस पर स्वदेशी संकल्प दौड का आयोजन कर छात्रों को स्वावलंबी भारत का सपना साकार करने के लिए प्रेरित किया है। इसके साथ-साथ कौशल परक शिक्षा से स्वावलंबी भारत का निर्माण करेंगे ताकि विकसित भारत का सपना साकार हो सकें। कुवि कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल सिंह ने सभी अतिथियों, शिक्षकों व छात्रों का आभार व्यक्त किया कि सभी ने कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया। छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. ए.आर. चौधरी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। मंच का संचालन प्रो. विवेक चावला ने किया। इस अवसर पर डॉ. ममता सचदेवा, कुलसचिव प्रो. वीरेन्द्र पाल सिंह, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार, डीन ऑफ कॉलेजिज प्रो. ब्रजेश साहनी, प्रो. डी.एस.राणा, प्रो. संजीव अग्रवाल, प्रो. कृष्णा, प्रो. सुनीता सिरोहा, प्राक्टर प्रो. अनिल गुप्ता, मुख्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. आनंद कुमार, प्रो. संजीव शर्मा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. अंकेश्वर प्रकाश, प्रो. परमेश कुमार, डॉ. महेन्द्र सिंह, डॉ. गुरचरण सिंह, डॉ. सलोनी दिवान, लोक सम्पर्क विभाग की उप-निदेशक डॉ. जिम्मी शर्मा, डॉ. सुशील टाया सहित शिक्षक, कर्मचारी व विद्यार्थी मौजूद रहे।

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