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12 हत्या आरोपियों को आजीवन कारावास प्रत्येक दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थ दंड लगा जुर्माना

12 हत्या आरोपियों को आजीवन कारावास प्रत्येक दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थ दंड लगा जुर्माना

आजमगढ़। दिवानी न्यायलय ने 27 वर्ष पूर्व मुबारकपुर थाना क्षेत्र में शिया-सुन्नी विवाद के दौरान हुई हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय की अदालत ने मंगलवार को दोषी करार दिए गए 12 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 50 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है। सजा के ऐलान को लेकर पहले से ही कोर्ट परिसर में गहमागहमी का माहौल रहा। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखी गई थी। उल्लेखनीय है कि बीते शुक्रवार को अदालत ने सभी 12 आरोपियों को हत्या का दोषी ठहराया था और सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तिथि निर्धारित की थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी नासिर हुसैन ने 30 अप्रैल 1999 को मुबारकपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अपनी तहरीर में उन्होंने बताया कि उनके चाचा अली अकबर, निवासी पूरा ख्वाजा, 27 अप्रैल 1999 से लापता थे। अली अकबर के पुत्र जैगम ने 28 अप्रैल को गुमशुदगी की सूचना दी थी। 30 अप्रैल को अली अकबर की सिर कटी लाश राजा भाट के पोखरे से बरामद की गई। विवेचना में सामने आया कि मोहर्रम के जुलूस से लौटते समय सुन्नी समुदाय के कुछ लोगों ने मारपीट कर उनकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने मामले में हुसैन अहमद, मोहम्मद अयूब फैजी, फहीम अख्तर, असरार अहमद, मोहम्मद याकूब, अली जहीर, इरशाद, मोहम्मद असहद, अफजल, अलाउद्दीन, दिलशाद तथा वसीम सहित कुल 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। मुकदमे के दौरान हाजी मोहम्मद सुलेमान, नजीबुल्लाह, हमीदुल्लाह उर्फ झीनक और हाजी अब्दुल खालिक की मृत्यु हो गई। अभियोजन की ओर से डीजीसी फौजदारी प्रियदर्शी पियूष त्रिपाठी एवं एडीजीसी दीपक कुमार मिश्रा ने नौ गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सभी 12 आरोपियों को अली अकबर की हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। करीब तीन दशक पुराने इस बहुचर्चित मामले में आए फैसले को न्यायिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

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