छठे नवरात्र पर मां कात्यायनी की पूजा और संकीर्तन हुआ : डॉ. मिश्रा

थानेसर, प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 24 मार्च : श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली (कुरुक्षेत्र) के पीठाधीश ज्योतिष और वास्तु आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि कात्यायनी माँ दुर्गा का छठा स्वरुप है।
नवरात्रि का छठा दिन माँ कात्यायनी का है। प्रसिद्ध महर्षि कात्यान ने कठोर तप कर माँ से उनकी पुत्री के रूप में जन्म लेने का वरदान माँगा, ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर माँ पराम्बा ने उनकी इस इच्छा को पूरा किया और ऋषि कात्यान की पुत्री “देवी कात्यायनी” कहलाई। चार भुजा धारी माँ कात्यायनी सिंह पर सवार हैं I अपने एक हाथ में तलवार और दूसरे में अपना प्रिय पुष्प कमल लिये हुए हैं। अन्य दो हाथ वरमुद्रा और अभयमुद्रा में हैं।
इनके पूजन से अद्भुत शक्ति का संचार होता है। मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी मानी गई हैं। शिक्षा प्राप्ति के क्षेत्र में प्रयासरत भक्तों को माता की अवश्य उपासना करनी चाहिए। मां दुर्गा अपने भक्तों के सारे दुर्गुणों को दूर कर देती है। माँ अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती है।
श्री दुर्गा देवी मंदिर के पुजारी पण्डित राहुल मिश्रा ने वैदिक मन्त्रों से माँ दुर्गा की पूजा अर्चना धर्मपाल गर्ग ने परिवार सहित करवाई। श्रद्धालु भक्तों ने माँ दुर्गा को लाल रंग की चुन्नियाँ,नारियल ,श्रृंगार का सामान और प्रसाद अर्पण किया I
समस्त विश्व कल्याण हेतु माँ दुर्गा का संकीर्तन व श्री दुर्गा चालीसा का पाठ किया गया। मां दुर्गा की सुन्दर भेंटे सुमित्रा पाहवा, आशा कवात्रा, सरोज शर्मा, कोमल मेहरा, अनु पाहवा, निशा अरोड़ा, शिमला धीमान और भक्त सुशील तलवाड़ के साथ सभी भक्तों ने गाई।
माँ दुर्गा के कीर्तन के पश्चात् श्रद्धा भावना से आरती की गयी और प्रसाद वितरण हुआI




