
नारी शक्ति वंदन अधि. के तहत वि. वि .परिसर में रैली एवं हस्ताक्षर अभियान का आयोजन
भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की संवाहक होती है मातृशक्ति,
……….. कुलपति
आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़ परिसर में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम–2023’ के प्रचार-प्रसार हेतु परिसर में एक व्यापक एवं उत्साहपूर्ण जागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। मा. कुलपति प्रो० संजीव कुमार जी के संरक्षण में 10 से 20 अप्रैल तक चलने वाले इस विशेष अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं समाज के विभिन्न वर्गों को इस ऐतिहासिक अधिनियम की महत्ता से अवगत कराना तथा महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना है।
विश्वविद्यालय का मीडिया प्रभारी ने बताया कि इसी क्रम में आज विश्वविद्यालय परिसर में साइकिल एवं बाइक/स्कूटी रैली का भव्य आयोजन किया गया। कुलपति जी के कुशल निर्देशन एवं मार्गदर्शन के तहत रैली को राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के समन्वयक डॉ० देवेंद्र पांडे जी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और जन-जागरूकता का संदेश प्रसारित किया। रैली विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरी, जिससे परिसर के साथ-साथ आस-पास के क्षेत्रों में भी इस अधिनियम के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रभावी प्रयास किया गया। प्रतिभागी विद्यार्थियों का उत्साह, ऊर्जा और प्रतिबद्धता इस आयोजन की सफलता का प्रमुख आधार रहा।
इस अभियान के अंतर्गत आज हस्ताक्षर अभियान का भी आयोजन किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के कुलपति, अधिकारीगण, शिक्षकगण एवं कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की। सभी ने अपने हस्ताक्षर के माध्यम से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम–2023’ के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया और इसे महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में समान अवसर प्रदान करने वाला एक ऐतिहासिक कदम बताया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के भाषण का सामूहिक श्रवण रहा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभागार में अधिकारीगण, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री जी के प्रेरणादायी एवं प्रभावशाली उद्बोधन को सभी ने गहन रुचि एवं उत्साह के साथ सुना। जब उन्होंने यह उल्लेख किया कि भारत में महिलाओं की बढ़ती सहभागिता को देखकर विश्व के अन्य देश आश्चर्यचकित हैं, तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा, जो उपस्थित जनसमूह की सहमति और गर्व की भावना को दर्शाता था।
कुलपति प्रो० संजीव कुमार जी ने अपने संबोधन में कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम–2023’ न केवल महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र को और अधिक समावेशी एवं सुदृढ़ बनाने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में सदैव ‘मातृशक्ति’ को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, और अब समय आ गया है कि इस सम्मान को नीतिगत एवं संवैधानिक अधिकारों के रूप में भी सुदृढ़ किया जाए।
कार्यक्रम संयोजक डॉ० निधि सिंह ने जानकारी दी कि इस अभियान के सफल संचालन में डॉ० मनीषा सिंह, डॉ० प्रियंका सिंह, डॉ० शशि प्रकाश शुक्ला, डॉ० सचिन राय, डॉ० अंकुर चौबे एवं श्री सूर्य प्रकाश अग्रहरि का विशेष योगदान रहा। उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के व्यापक प्रचार-प्रसार से समाज में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।
समग्र रूप से यह आयोजन न केवल जागरूकता बढ़ाने में सफल रहा, बल्कि विश्वविद्यालय समुदाय में महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण के प्रति एक नई चेतना और प्रतिबद्धता का संचार भी किया।

