
दीपक शर्मा (जिला संवाददाता )
बरेली : पेशे से अधिवक्ता गौरव सिंह द्वारा पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए जाने के मामले में नया मोड़ आ गया है। प्रार्थी ने न्यायालय में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि गत दिनों पंचशील नगर, पीलीभीत बाईपास, थाना बारादरी क्षेत्र स्थित अपने आवास से कचहरी जाते समय उन्हें घर से लगभग 150 मीटर की दूरी पर क्राइम ब्रांच के निरीक्षक इंद्र कुमार एवं अन्य पुलिसकर्मियों की सहायता से गिरफ्तार किया गया था।
प्रार्थी का आरोप है कि गिरफ्तारी के दौरान उनका अधिवक्ता बैंड जमीन पर गिर गया, जिसे उठाने पर निरीक्षक इंद्र कुमार ने कथित रूप से छीन लिया और उसका अपमान किया। इसके बाद उन्हें एक निजी वाहन में बैठाकर पुलिस लाइन ले जाया गया तथा मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न किया गया। बाद में कोतवाली बरेली के लॉकअप में बंद कर दिया गया।
प्रार्थी के अनुसार, उन्हें विभिन्न स्थानों पर ले जाया गया, जिनमें रामगंगा डैम क्षेत्र भी शामिल है। आरोप है कि वहां पुलिसकर्मियों ने दबाव बनाकर उनका वीडियो एवं फोटो तैयार किया, जिसके आधार पर कथित रूप से मनमाना स्वीकारोक्ति बयान दर्ज करते हुए मुकदमे में धारा 302 एवं 201 की बढ़ोतरी कर दी गई।
प्रार्थी ने यह भी आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के लगभग 30 घंटे बाद उन्हें रिमांड हेतु माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जो विधिक प्रावधानों एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के विपरीत है।
मामले में प्रार्थी ने न्यायालय से मांग की है कि गिरफ्तारी से लेकर विभिन्न स्थानों पर ले जाए जाने तक की सीसीटीवी फुटेज, संबंधित पुलिसकर्मियों एवं अन्य कर्मचारियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कराई जाए। साथ ही जांच उनकी एवं उनके अधिवक्ता की उपस्थिति में कराए जाने तथा निष्पक्षता एवं पारदर्शिता बनाए रखने के लिए किसी क्षेत्राधिकारी (सीओ) स्तर के अधिकारी से जांच कराने की मांग की गई है।
माननीय न्यायालय द्वारा मामले का संज्ञान लिए जाने के बाद अब इस प्रकरण की जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।


