
हरियाणा संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक।
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हिसार,11 मई : लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), हिसार में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026 उत्साहपूर्वक मनाया गया।

कार्यक्रम का आयोजन मानव संसाधन प्रबंधन निदेशालय (डीएचआरएम) द्वारा वेटरनरी एनाटॉमी लेक्चर हॉल में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का उत्सव मनाने के साथ-साथ नवाचार, उद्यमिता एवं तकनीक आधारित विकास को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं नवाचार से जुड़े हितधारकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. रचना द्वारा स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए संस्थानों में नवाचार की संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
इसके पश्चात मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. सोनिया सिंधु ने संस्थान नवाचार परिषद (आईआईसी) की गतिविधियों एवं उपलब्धियों का परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों में नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और उद्यमशील सोच को प्रोत्साहित करने हेतु लुवास द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं विशिष्ट अतिथि एग्रीइनोवेट इंडिया लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. प्रवीण मलिक ने “इनोवेशन टू एंटरप्राइज : ए ट्रांसफॉर्मेटिव इनिशिएटिव बाय एग्रीइनोवेट इंडिया” विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि भारत में शोध एवं नवाचार की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इन नवाचारों को समाज और उद्योग की आवश्यकताओं से जोड़ना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में विकसित तकनीकों को व्यावसायिक रूप देने के लिए मजबूत उद्योग-अकादमिक सहयोग, प्रभावी स्टार्टअप इकोसिस्टम तथा निवेश एवं मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं युवा शोधकर्ताओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आज का युवा केवल नौकरी पाने तक सीमित न रहे, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला उद्यमी बने। उन्होंने एग्रीइनोवेट इंडिया द्वारा नवउद्यम एवं नवाचारों को दिए जा रहे समर्थन, तकनीकी व्यवसायीकरण की प्रक्रिया तथा बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उनके व्याख्यान के बाद प्रतिभागियों के साथ संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं लुवास के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) विनोद कुमार वर्मा ने कहा कि प्रौद्योगिकी राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला है और विश्वविद्यालयों को ऐसे नवाचार केंद्रों के रूप में कार्य करना चाहिए, जहां विचारों को समाज के लिए उपयोगी समाधानों में परिवर्तित किया जा सके। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल तकनीक का उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि नवाचार का निर्माता बनना होगा। कृषि, पशुपालन एवं स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में नई तकनीकों का प्रभावी उपयोग व्यापक परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना भी है। कुलपति ने युवा शोधकर्ताओं एवं शिक्षकों को तकनीक आधारित राष्ट्रीय विकास में सक्रिय योगदान देने तथा नवाचार एवं स्टार्टअप गतिविधियों में बढ़- चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. अमन मुद्गिल ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि,आयोजन समिति तथा सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
इस आयोजन ने नवाचार आधारित शैक्षणिक वातावरण विकसित करने तथा विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के क्षेत्र में भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में लुवास की प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया।
सहायक जनसंपर्क अधिकारी डॉ. सतीश जांगड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस जैसे आयोजन विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को नवाचार, तकनीकी सोच एवं उद्यमिता की दिशा में प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि लुवास निरंतर ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से युवा प्रतिभाओं को वैज्ञानिक एवं तकनीकी विकास से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
कुलपति लुवास डॉ. विनोद कुमार वर्मा सम्बोधित करते हुए
मुख्य वक्ता डॉ. प्रवीन मलिक सम्बोधित करते हुए।
कुलपति लुवास डॉ. वर्मा – डॉ. प्रवीन मलिक को स्मृति चिन्ह देते हुए साथ में निदेशिका डॉ. सोनिया सिन्धु।


