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गीता का ज्ञान पूरे विश्व के लिए अमृत तुल्य : प्रो. सोमनाथ सचदेवा

केयू में 10वें अंतर्राष्ट्रीय गीता कांफ्रेंस का आयोजन 24 से 26 नवम्बर।
श्रीमद्भगवद्गीतोक्त स्वधर्म : कर्तव्यनिष्ठा, शांति, सद्भावना एवं स्वदेशी की प्रेरणा विषय को लेकर विद्वतजन करेंगे चिंतन
समीक्षा बैठक की कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने की अध्यक्षता।

कुरुक्षेत्र, संजीव कुमारी 18 नवंबर : विदेश मंत्रालय भारत सरकार, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय तथा कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 24 से 26 नवम्बर के बीच आयोजित होने वाले तीन दिवसीय 10वें अंतर्राष्ट्रीय गीता कांफ्रेंस के आयोजन समिति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि गीता का ज्ञान पूरे विश्व के लिए अमृत तुल्य है। गीता का ज्ञान हर युग, हर परिस्थिति और हर मानव के जीवन में मार्गदर्शन प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि गीता का स्वधर्म और स्वदेशी का संदेश नैतिक उत्तरदायित्व, राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और सामाजिक सद्भाव की प्रेरणा देकर आधुनिक भारत के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है। गीता केवल धर्मग्रंथ नहीं, बल्कि एक जीवन-दर्शन है जो सम्पूर्ण विश्व मेंलोगों को शांति, स्थिरता और सकारात्मक दिशा प्रदान कर रहा है। भारतीय दर्शन की यह अनमोल धरोहर अब वैश्विक चेतना का अभिन्न हिस्सा बनती जा रही है।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती कांफ्रेंस के लिए गठित विभिन्न आयोजन समिति के कंवीनर एवं सदस्यों से कांफ्रेंस संबंधी तैयारियों का जायजा लिया। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय गीता सम्मेलन में देश-विदेश के गीता प्रेमी, विद्वान, गणमान्य अतिथि व अनेक देशों के प्रतिनिधि भागीदारी करेंगे व श्रीमद्भगवद्गीतोक्त स्वधर्म : कर्तव्यनिष्ठा, शांति, सद्भावना एवं स्वदेशी की प्रेरणा विषय पर चर्चा करेंगे। उन्होंने इस सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए गठित विभिन्न कमेटियों के संयोजकों एवं सदस्यों को निर्देश देते हुए कहा कि सम्मेलन में मेहमानों के स्वागत, रहने खाने व ठहरने सहित अन्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए तैयारियां जल्द पूरी की जाएं ताकि मेहमानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
कुवि कुलसचिव लेफ्टिनेंट डॉ. वीरेंद्र पाल ने कहा कि गीता सम्मेलन के सुचारू और सफल आयोजन के लिए सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। सम्मेलन निदेशक प्रो. तेजिंदर शर्मा ने बताया कि 18 नवंबर तक 647 शोध पत्र प्राप्त हो चुके हैं और उन्होंने बताया कि इस आयोजन के दौरान एक स्मारिका और सम्मेलन पत्रिका का विमोचन किया जाएगा। प्रो. तेजेन्द्र शर्मा ने बताया कि कुवि कुलसचिव डॉ. वीरेन्द्र पाल व सीडीओई की निदेशिक प्रो. मंजूला चौधरी इस सम्मेलन के सलाहकार हैं तथा प्रो. वनिता ढींगरा, उपनिदेशक, प्रो. विवेक चावला आयोजन सचिव व डॉ. सलोनी पवन दिवान संयुक्त सचिव होंगी। वहीं सलाहकार समिति में श्री उपेंद्र सिंघल, माननीय सचिव केडीबी, डॉ. प्रीतम सिंह, सदस्य मेला समिति, डॉ. संदीप छाबड़ा, सदस्य केडीबी और श्री ऋषिपाल मथाना, पूर्व सदस्य केडीबी शामिल हैं।
प्रो. तेजेन्द्र शर्मा ने बताया कि सम्मेलन के लिए कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के आदेशानुसार अतिरिक्त प्लेनरी सत्र कमेटी, तकनीकी सत्रों के लिए कमेटी, पोस्टर प्रस्तुति, पर्चेज कमेटी, वेबसाइट कमेटी, फोटोग्राफी कमेटी, पब्लिकेशन एवं प्रिटिंग कमेटी, किट तथा मोमेंटो कमेटी, हास्पिटलेटी कमेटी, पंजीकरण व सर्टिफिकेट कमेटी, डेकोरेशन कमेटी, रिसेप्शन कमेटी, हेलीपेड रिसेप्शन कमेटी, सीटिंग अरेंजमेंट कमेटी, स्टेज मैनेजमेंट कमेटी, साउंड एंड लाईट अरेंजमेंट कमेटी, इलेक्ट्रिसिटी अरेंजमेंट कमेटी, एकोमोडेशन एंड ट्रांसपोटेशन कमेटी, सेनीटेशन कमेटी, इमेरजेंसी एंड मेडिकल हेल्प कमेटी, सिक्योरिटी कमेटी तथा मीडिया एवं पीआर कमेटी का गठन किया गया है। इन कमेटियों के संयोजक तथा अधिकारी पूरे सम्मेलन के सुचारू संचालन में सहयोग करेंगे।
लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि पंजीकृत प्रतिभागी सम्मेलन के प्रमुख विषयों में स्वधर्म का बोध : धर्ममय कर्म का आंतरिक मार्गदर्शक, स्वधर्म और नेतृत्व नैतिकता : व्यक्तिगत सत्यनिष्ठा से वैश्विक उत्तरदायित्व तक, गीता और सतत मानव विकास : पृथ्वी एवं मानवता के प्रति कर्तव्य, विविध संस्कृतियों एवं धर्मों के संदर्भ में स्वधर्म की व्याख्या, स्वधर्म, निष्काम कर्म एवं मानव कल्याण, शासन एवं सार्वजनिक नीति में निर्णय-निर्माण हेतु स्वधर्म का मार्गदर्शन, चरित्र, समरसता एवं नागरिकता हेतु शिक्षा में स्वधर्म की भूमिका विषय पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके साथ ही प्रतिभागी भगवद्गीता के स्वधर्म-सिद्धांत से प्रबंधन की नई परिकल्पना, गीता की संतुलन-दृष्टि में लिंग, परिवार एवं धर्म की भूमिका, विभाजित विश्व में शांति की स्थापना हेतु स्वधर्म का योगदान, पर्यावरण-धर्म : पारिस्थितिक उत्तरदायित्व के लिए गीता का संदेश, स्वधर्म और योग-विज्ञान : आंतरिक समरसता का मार्ग, नैतिकता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, प्रौद्योगिकी एवं मानव संकल्पशीलता : गीता के आलोक में, गीता, वैश्वीकरण एवं सार्वभौमिक मूल्यों की खोज, भावी सभ्यताओं के लिए स्वधर्म की प्रासंगिकता : संघर्ष से चेतना की ओर विषयों पर अपने शोध पत्रप्रस्तुत कर सकते हैं।
इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. वीरेन्द्र पाल, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. राकेश कुमार, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एआर चौधरी, प्रो. प्रीति जैन, प्रो. सुशीला चौहान, प्रो. अनिल मित्तल, प्रो. सुनील ढींगरा, प्रो. डीएस राणा, प्रो. तेजेन्द्र शर्मा, प्रो. रीटा दलाल, डॉ. आनन्द कुमार, लोक सम्पर्क विभाग की उपनिदेशक डॉ. जिम्मी शर्मा, प्राचार्य डॉ. सुखविन्द्र सिंह सहित विभिन्न कमेटियों के सदस्य मौजूद थे।

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