खरीफ 2025- बीज व उर्वरक वितरण में 80 प्रतिशत से अधिक प्रगति


दलहन-तिलहन के क्षेत्र में भी लक्ष्य से बढ़कर काम, किसानों को मिल रही प्रोत्साहन, योजनाओं की जानकारी

कोरिया 07 जुलाई 2025/ खरीफ 2025 सीजन के लिए जिले में किसानों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण बीज एवं उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित करने जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा व्यापक तैयारी की गई है। उप संचालक कृषि श्री राजेश भारती ने जानकारी दी कि किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिले में बीज एवं उर्वरक के भंडारण एवं वितरण की प्रक्रिया को तेज़ी से अंजाम दिया गया है।

प्राप्त विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जिले में अब तक 5451.98 क्विंटल बीज का भंडारण किया जा चुका है, जिसमें से 4135.90 क्विंटल बीज किसानों को वितरित किया गया है। यह कुल भंडारण का लगभग 76 प्रतिशत है। वितरण कार्य को पारदर्शी बनाने हेतु सहकारी समितियों और विभागीय अमले के माध्यम से बीज उठाव की व्यवस्था की गई है।

इसी प्रकार, रासायनिक उर्वरकों में 9665 मीट्रिक टन का भंडारण किया गया है, जिसमें से 7730 मीट्रिक टन (लगभग 80 प्रतिशत) किसानों तक पहुँच चुका है। उर्वरकों में यूरिया, डीएपी, एनपीके (12रू32रू16), एसएसपी जैसे विकल्प उपलब्ध कराए जा रहे हैं। डीएपी की कमी को देखते हुए एनपीके के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है तथा इसके लाभों की जानकारी दी जा रही है।

गुणवत्ता पर विशेष ध्यान, दुकानों में छापेमारी
बीज एवं उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने और गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन व कृषि विभाग द्वारा सख्त निगरानी की जा रही है। हाल ही में सहकारी एवं निजी दुकानों में छापेमारी कर 45 बीज और 16 उर्वरक नमूनों को जांच हेतु प्रयोगशाला भेजा गया है।

दलहन-तिलहन का क्षेत्र होगा और विस्तृत
कृषि विभाग द्वारा वर्ष 2025 के लिए दलहन 9850 हेक्टेयर और तिलहन 2350 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो कि पिछले वर्ष के मुकाबले क्रमशः 656 हेक्टेयर एवं 476 हेक्टेयर अधिक है। जिले में नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल एंड ऑयलसीड्स एवं अन्य योजनाओं के तहत किसानों को जागरूक किया जा रहा है। अब तक 445.28 क्विंटल दलहन-तिलहन बीज (जैसे उड़द, मूंग, अरहर, मूंगफली) का भंडारण किया गया है, जिनमें से 369 क्विंटल बीजों का वितरण हो चुका है।

धान के स्थान पर लें वैकल्पिक फसलें, कृषि विभाग की अपील
किसानों से अपील करते हुए उप संचालक श्री भारती ने कहा कि वे धान की परंपरागत खेती के स्थान पर दलहन व तिलहन फसलों की ओर रुख करें तथा मेड़ों पर अरहर जैसी फसलें लगाकर भूमि का अधिकतम उपयोग करें। इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, बल्कि आय में भी इज़ाफा होगा।

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