बरेली: श्री हरि मंदिर में गूंज रही रामकथा, सातवें दिन केवट प्रसंग और भरत मिलाप सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

  • मॉडल टाउन स्थित श्री हरि मंदिर में नौ दिवसीय श्री राम कथा का सप्तम दिवस।
  • ब्रह्मलीन मानस रत्न डॉ. श्रीनाथ मिश्र के सुपौत्र, वाराणसी से पधारे युवा ओजस्वी वक्ता पंडित आशीष मिश्र।
  • अयोध्याकाण्ड के अंतर्गत वनगमन, केवट संवाद और भरत के सर्वोच्च त्याग की कथा।
    बरेली।
    मॉडल टाउन स्थित श्री हरि मंदिर में चल रही नौ दिवसीय श्री राम कथा के सातवें दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। वाराणसी धाम से पधारे युवा ओजस्वी वक्ता पंडित आशीष मिश्र (सुपौत्र: ब्रह्मलीन मानस रत्न डॉ. श्रीनाथ मिश्र) ने अपनी अमृतमयी और धाराप्रवाह वाणी से भगवान श्री राम के वनगमन और भरत मिलाप के मार्मिक प्रसंगों का सजीव वर्णन कर उपस्थित भक्तों को भावविभोर कर दिया।
    कथा की शुरुआत मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष सुशील अरोरा, सचिव रवि छाबड़ा, रमेश खनिजों, अनिता खनिजों और मलिक बंधुओं द्वारा महाराज जी के माल्यार्पण के साथ हुई। आज की कथा में मुख्य यजमान बनने का सौभाग्य आर.के. शर्मा और उनके परिवार को प्राप्त हुआ।

केवट की निष्काम भक्ति और भरत का त्याग सर्वोच्च आदर्श

सप्तम दिवस की कथा का रसपान कराते हुए पंडित आशीष मिश्र ने बताया कि अयोध्याकाण्ड में भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियों के बीच मंथरा के बहकावे में आकर माता कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वरदान मांगे—भरत का राज्याभिषेक और श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास। पिता के वचनों की मान रखने के लिए प्रभु श्री राम सहर्ष वन चले गए और उनके साथ माता सीता व लक्ष्मण जी ने भी वनगमन किया।
वक्ता ने केवट प्रसंग की व्याख्या करते हुए कहा:

“शृंगवेरपुर में जब केवट ने प्रभु के चरण धोकर उन्हें गंगा पार कराया, तो पारिश्रमिक देने पर उसने अत्यंत विनम्रता से कहा कि प्रभु, आज मैंने आपको नदी पार कराई है, आप मुझे भवसागर से पार लगा देना। यह निष्काम भक्ति का अद्भुत उदाहरण है।”

आगे की कथा में उन्होंने भरत मिलाप का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब भरत जी ननिहाल से लौटे और पिता के देहावसान व श्री राम के वनवास की बात सुनी, तो उन्होंने राज्य ठुकरा दिया। वे श्री राम को मनाने चित्रकूट पहुंचे। वहां दोनों भाइयों का मिलन अत्यंत भावुक था। जब श्री राम ने पिता की आज्ञा को सर्वोपरि रखकर लौटने से मना किया, तो भरत जी प्रभु की चरणपादुकाएं (खड़ाऊं) लेकर अयोध्या लौटे और नंदिग्राम में एक तपस्वी की भांति रहकर 14 वर्षों तक राजकाज संभाला। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भरत जी को त्याग, धर्म और भ्रातृप्रेम का सर्वोच्च आदर्श माना है।

दिव्य वाणी से सराबोर हुए बरेलीवासी

मंदिर के सचिव रवि छाबड़ा ने श्री हरि मंदिर प्रबंध समिति की ओर से कथाव्यास पंडित आशीष मिश्र का आभार जताते हुए कहा कि महाराज जी की ओजस्वी और हृदयस्पर्शी वाणी से पूरी बरेली धर्ममय हो गई है। उन्होंने कथा में आ रहे सभी भक्तों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस दिव्य आयोजन में मुख्य रूप से अध्यक्ष सुशील अरोरा, सचिव रवि छाबड़ा, अश्विनी ओबेरॉय, संजय आनन्द, गोविन्द तनेजा, रंजन कुमार, राजेश अरोरा, हरीश लुनियाल और महिला मण्डल की अध्यक्ष रेनू छाबड़ा समेत भारी संख्या में महिला मंडल की सदस्य व श्रद्धालु उपस्थित रहे।

VV NEWS

राष्ट्रीय कार्यालय रमाकान्त पाण्डेय(गोपालपुरी) संरक्षक/संस्थापक ग्राम व पोस्ट- गोपालपुर (टावर) थाना व तहसील- मेहनगर जिला-आजमगढ़, उत्तर प्रदेश पिंन कोड़-276204 मोबाईल-9838825561,7054825561 हेंड कार्यालय/प्रशासनिक कार्यालय जितेंद्र पटेल (प्रमुख संपादक/प्रशासनिक संपादक) ग्राम व पोस्ट- 495668 थाना व तहसील-जांजगीर जिला-जांजगीर (छत्तीसगढ) पिंन कोड़-495668 मोबाईल-6265564514

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

एक शाम कबीर के नाम: कबीर जयंती पर कवि सम्मेलन, मुशायरा व सम्मान समारोह आयोजित

Tue Jun 30 , 2026
एक शाम कबीर के नाम: कबीर जयंती पर कवि सम्मेलन, मुशायरा व सम्मान समारोह आयोजित रायबरेली। ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा के अवसर पर सद्गुरु कबीर साहब की जयंती जिले में अनूठे अंदाज में मनाई गई। संत रैदास आश्रम सामुदायिक केंद्र में आयोजित “एक शाम कबीर के नाम” कार्यक्रम के तहत […]

You May Like

Breaking News

advertisement