पंजाब के शहर मुकेरियां मे विकास के नाम पर वादों के अनुरूप काम नही होने के कारण मुकेरियां जनता ठगा हुआ महसूस करती है

पंजाब के शहर मुकेरियां मे विकास के नाम पर वादों के अनुरूप काम नही होने के कारण मुकेरियां जनता ठगा हुआ महसूस करती है
भारतीय मानवाधिकार महासंघ के पदाधिकारियों ने कुछ दिन पहले शहर मुकेरियां मे क्या काम हुआ पदाधिकारियों ने सर्वे किया जिसको देखते बहुत शर्मा महसूस हुआ शहर में विकास के नाम पर और दावों की हकीकत में बड़ा अंतर अक्सर देखने को मिला और विकास और वादों के अनुरूप काम नही नहीं होने से जनता अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रही है क्योंकि दैनिक जीवन का असर सड़कों, नालियों और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली के कारण नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है विकास के नाम पर दावों और जमीनी हकीकत के बीच यह खाई निवासियों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है लोगों से बातचीत से पता चलता है कि मुकेरियां शहर मे कही भी विकास दिखाई नहीं देता क्योंकि यह यह शहर पंजाब में क्या देश विदेश में चर्चा होती है हर गांव में लोग विदेशों में रहने के कारण मशहूर है मुकेरियां जितना विकास कार्यों होना चाहिए था और पहचान मिलनी चाहिए थी नहीं मिल सकी काम किसी ने कराकर दिया ही नहीं शहर मे बहुत समास्या है सड़कें खराब है सफाई व्यवस्था ठप पड़ी है यहां कोई काम नहीं हुआ ही नहीं जिससे कोई याद करें रोडवेज का बस अड्डे का बूरा हाल है जब वर्षा होती है तो निकलना मुश्किल हो जाता है नगर कौंसिल मुकेरियां की कोई सुविधा नहीं यह एक आम शिकायत है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी नज़र आ रही है आपसी गुटबाजी के कारण स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों बाधित होते है केंद्र और राज्य सरकार के बीच खींचतान या शिलान्यास के बाद काम शुरू न होना भी विकास कार्य के रुकने के प्रमुख कारण हो सकते है जिससे क्षेत्र की प्रगति प्रभावित होती है इसलिए नागरिकों को इस समस्या को दूर करने के लिए सक्रिय भागीदारी और जिम्मेदार प्रतिनिधियों को चुनना आवश्यक है और इस बार कोई भी पार्टी नेता आप से सहयोग मांगने आए तो एकबार जरूर पुराने वादों को याद जरूर कराएं भारतीय मानवाधिकार महासंघ पंजाब के पदाधिकारियों की तरफ से हाथ जोड़कर प्रार्थना करते है कि इस बार मुकेरियां के नागरिक और मिडिया वाले इनके वादें ज़रुर याद करायें हमेशा भारतीय मानवाधिकार महासंघ पदाधिकारी और कार्यकर्ता हमेशा आप के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं




