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होली मैत्री भाव का महापर्व है : समर्थगुरू सिद्धार्थ औलिया

हरियाणा संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक
ब्यूरो चीफ – संजीव कुमारी, दूरभाष – 94161 91877

कुरुक्षेत्र : श्री दुर्गा देवी मंदिर पिपली, कुरुक्षेत्र के पीठाधीश और समर्थगुरु धारा हिमाचल के ज़ोनल कोऑर्डिनेटर ज्योतिष और वास्तु आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया होली का त्यौहार 4 मार्च 2026 को मनाया जाएगा।
चैत्र कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि और बुधवार का दिन है। प्रतिपदा तिथि शाम 4 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। प्रातः 8 बजकर 53 मिनट तक धृति योग रहेगा। प्रातः 7 बजकर 39 मिनट तक पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा और उसके बाद उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र लग जायेगा।
होली महोत्सव के लिए शुभ मुहूर्त और शुभ चौघड़िया :
ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 5:18 से 06:07 तक
गोधूलि मुहूर्त : सायं 6:43 से 7:07 तक
लाभ चौघड़िया : प्रातः 6:47 से 8:14 तक
अमृत चौघड़िया : प्रातः 8:14 से 9:41 तक
शुभ चौघड़िया : प्रातः 11:48 से दोपहर 12:35 तक
होली पर विशेष गुलाल के रंगों का प्रयोग आपकी राशि अनुसर सुख समृद्धि में सहयोग करेगा भगवान की कृपा अनुसार :
मेष और वृश्चिक राशि: इस राशि के लोगों को पीले और गुलाबी रंगों से होली खेलनी चाहिए I
वृष और तुला राशि : इस राशि के लोगों को सिल्वर रंग , हल्के नीले एवं आसमानी रंगों से होली खेल सकते हैं I
मिथुन और कन्या राशि : इस राशि के लोगों को नारंगी, पीले और गुलाबी रंग से होली खेलनी चाहिए I
कर्क राशि : इस राशि के लोगों को सफेद रंग से होली खेलनी चाहिए ।
सिंह राशि : इस राशि के लोगों को पीले, नारंगी और हल्के हरे आदि रंगों से होली खेलनी चाहिए I
धनु और मीन राशि : इस राशि के लोगों को पीले और नारंगी रंग से होली खेलनी चाहिए I
मकर और कुंभ राशि : इस राशि के लोगों को फिरोजी हरा, आसमानी और नीले रंग से होली खेलनी चाहिए I
श्रद्धा और भक्ति पूर्वक अपने गुरु और इष्ट देवी देवता के चरणों में गुलाल अर्पित करें। पूजा और आरती परिवार सहित करें । भोग लगाएं फिर अपने परिवार और मित्रों के साथ उमंग उत्साह से होली मनाए।
समर्थगुरू धाम मुरथल, हरियाणा के संस्थापक आदरणीय समर्थगुरू सिद्धार्थ औलिया जी ने होली के बारे में बताया कि होली एक महोत्सव का त्यौहार है।
महा उत्सव का अर्थ है- हम इतने आनंद में हैं कि अपने तक समेट नही सकते, उसको बाँटना चाहते है।
हम इतने प्रेम में हैं कि प्रेम की सुगंध अपने तक सीमित नहीं रख सकते है ।
आनंद और प्रेम का जब उत्कर्ष होता है, तो उसका नाम उत्सव है।
होली केवल उत्सव ही नही हमारी संस्कृति का भी उत्कर्ष है, हमारे भीतर आनंद का भी उत्कर्ष है, हमारे भीतर छिपे प्रेम का भी उत्कर्ष है, हमारे अहंकार के विसर्जन का भी उत्कर्ष है। होली “मैत्री भाव” को उत्कर्ष, पराकाष्ठा पर ले जाने का पर्व है। याद रखना- होली मैत्री भाव का पर्व है।
जहाँ मैत्री है वहाँ प्रसन्नता है।बिना मैत्री भाव के कोई प्रसन्न नही हो सकता है ।
यदि हमेशा खुश रहना चाहते हो तो पहले नंबर पर अपने भीतर छिपे हुए मैत्री भाव को महसूस करो और दूसरे नंबर पर सबके प्रति मैत्री भाव महसूस करो ।
यदि मैत्री भाव का यह स्वर्णिम सूत्र जीवन में उतार लिया तो मेरी चुनौती है कि कोई उदास होना चाहे तो नहीं हो
सकता है। इस होली के अवसर पर मेरा आशीर्वाद है- कि तुम इस मैत्री भाव को महसूस करते हुए हमेशा खुशी में जियो, उत्सव में जियो, प्रसन्नता में जियो।
समर्थगुरू धाम मुरथल में सभी साधक अपने परिवार सहित धूमधाम से होली मनाएंगे।

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