स्मार्ट एग्रीकल्चर योजना से आधुनिकतम तकनीकों के साथ कुरुक्षेत्र की 2000 एकड़ कलस्टर में शुरू की जाएगी प्राकृतिक खेती : नायब सिंह सैनी

प्राकृतिक खेती से उपजे अन्न से बनी थी भारत माता सोने की चिडिय़ा, जिसे आज अपनाने की जरुरत।


मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा एवं कलस्टर गठन कार्यक्रम को किया संबोधित।
सरकार ने प्राकृतिक खेती के लिए प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए कुरुक्षेत्र के गुरुकुल, जींद के हमेटी, सिरसा के मंगियाना और करनाल के घरौंडा में स्थापित किए प्रशिक्षण केंद्र।

थानेसर,प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 7 जून : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से कुरुक्षेत्र जिले में 2,000 एकड़ कलस्टर में आधुनिकतम तकनीकों द्वारा स्मार्ट एग्रीकल्चर नाम से एक नई योजना द्वारा प्राकृतिक खेती शुरू की जाएगी। इसमें यदि किसानों को किसी प्रकार का भी नुकसान होगा तो उसकी हर पाई की भरपाई हरियाणा सरकार द्वारा की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती वही खेती है, जो सदियों से मां गंगा और अन्य पावन नदियों के जल से लहलहाती आई है। इन नदियों ने पूरे आर्यव्रत में ऐसी उपजाऊ जमीन तैयार की है, जिससेउपजे अन्न से भारत माता सोने की चिडिय़ा बनी है। इसी भूमि पर हमारी समृद्ध संस्कृति फली-फूली है। यह संस्कृति सिखाती है कि जल, जंगल और जमीन, ये तीनों ही जीवन के आधार स्तंभ हैं और इनका संरक्षण ही सतत विकास का आधार है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी रविवार को कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के श्रीमद भगवद गीता सदन में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा आयोजित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा एवं कलस्टर गठन कार्यक्रम में बोल रहे थे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, चीफ व्हीप रामकुमार कश्यप, पूर्व राज्य मंत्री सुभाष सुधा, जिलाध्यक्ष तिजेंद्र सिंह गोल्डी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत प्राकृतिक खेती अभियान को आगे बढ़ाने में अनुकरणीय कार्य कर रहे हैं। खेती का काफी अनुभव रहा है। हरियाणा के साथ-साथ गुजरात और हिमाचल प्रदेश के हजारों किसानों को मिल रहा है। राज्यपाल आचार्य देवव्रत भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और प्राकृतिक जीवनशैली के सशक्त प्रेरणास्रोत भी हैं। आपने अपने जीवन को समाज सेवा, शिक्षा और विशेष रूप से प्राकृतिक खेती के प्रसार के लिए समर्पित किया है।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल आचार्य देवव्रत के प्रयासों से गुरुकुल, कुरुक्षेत्र में 180 एकड़ भूमि में बना प्राकृतिक कृषि फार्म हरियाणा के किसानों के लिए प्राकृतिक खेती का एक अनूठा उदाहरण है। इस फार्म में न कोई कीटनाशक प्रयोग किया जाता है, न ही कोई रासायनिक खाद। केवल गाय के गोबर और गौ मूत्र से तैयार जीवामृत, घन जीवामृत और बीजामृत का ही प्रयोग किया जाता है। खेती की यह पद्धति कम बजट पर आधारित है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2022 में प्राकृतिक खेती योजना शुरू की थी। सरकार ने प्राकृतिक खेती पर एक पोर्टल भी शुरू किया है। अब तक इस पोर्टल पर लगभग 2 लाख किसानों ने 3 लाख एकड़ क्षेत्र का पंजीकरण करवाया है। इसमें से 44 हजार 77 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए 23 हजार 930 किसानों का सत्यापन किया जा चुका है। वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश में 20 हजार 727 एकड़ क्षेत्र पर प्राकृतिक खेती की गई।
उन्होंने कहा कि सरकार ने प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए कुरुक्षेत्र के गुरुकुल, जींद के हमेटी, सिरसा के मंगियाना और करनाल के घरौंडा में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए हैं। गुरुकुल, कुरुक्षेत्र के प्रशिक्षण केन्द्र में प्रगतिशील किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए राज्य सलाहकार की भी नियुक्ति की गई है। अब तक 12 हजार 188 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें युवा किसान, महिलाएं और सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा, हमेटी के प्रशिक्षण केंद्र में राज्य के 6 हजार 234 सरपंचों को एक दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण भी दिया है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वर्ष 2025 से देसी गाय पर मिलने वाली सब्सिडी 30,000 रुपये कर दी गई है। यह सब्सिडी उन किसानों के लिए है, जिनके पास कम से कम 1 एकड़ जमीन है। कच्चे माल के भंडारण व प्रसंस्करण के लिए 4 ड्रम खरीदने हेतु प्रत्येक किसान को 3 हजार रुपये दिए जाएंगे। प्राकृतिक खेती योजना के तहत 2 हजार 500 किसानों को 4 ड्रम प्रति किसान की दर से 75 लाख रुपये, 1 हजार 171 देसी गाय की खरीद के लिए कुल 2 करोड़ 97 लाख रुपये अनुदान राशि सीधा किसानों के बैंक खाते में डाली गई। सरकार ने इस वित्त वर्ष के बजट में भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई प्रावधान किए हैं।
उन्होंने कहा कि कृषि विभाग के स्वामित्व वाली लगभग 800 एकड़ भूमि केवल उन्हीं किसानों को पट्टे पर दी जाएगी, जो कम से कम अगले 10 वर्ष तक उसमें प्राकृतिक व जैविक खेती करेंगे। इसी तरह पंचायत के स्वामित्व वाली भूमियों पर भी प्राकृतिक व जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए अगले वर्ष में एक नीति बनाई जाएगी। प्राकृतिक व जैविक किसानों को कृषि उपज बेचने के लिए मंडियों में जगह उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके साथ ही परीक्षण के लिए प्रयोगशालाएं तथा प्रमाणीकरण के लिए एपीडा द्वारा मान्यता प्राप्त केंद्र स्थापित किए जाएंगे, ताकि किसानों को अपनी प्राकृतिक व जैविक कृषि उपज बेचने के लिए बेहतर बाजार मिल सकें।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि मोरनी ब्लॉक को एक प्राकृतिक व जैविक ब्लॉक के रूप में विकसित किया जाएगा। किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करने के अलावा हमने आपको और भी अनेक प्रोत्साहन दिए हैं। हरियाणा में प्रदेश सरकार सभी 24 फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करते हैं।
खून पसीने, ईमानदारी से धन कमाने वाला राजाओं का राजा होता है किसान : आचार्य देवव्रत।
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि राजाओं का राजा किसान है। किसान का धन उसके खून पसीने, ईमानदारी की कमाई है। किसान ने सबका भला चाहा है। देश में 60 के दशक में पूरे देश के सभी प्रदेशों की भूमि का सर्वे किया गया, जहां में सभी जगहों की भूमि उपजाऊ मिली। इसके बाद पैदावार की दौड़ में भूमि लगातार बंजर होती गई और देश, समाज व किसानों के सामने कई प्रकार की समस्याएं आ खड़ी हुई। उन्होंने कहा कि आज की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रत्येक कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ रहे हैं। इसके बारे में किसानों को जागरूक करना बहुत जरूरी है।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किसानों के समझाते हुए कहा कि आज से 30-40 वर्ष पहले हमारे देश व समाज में शुगर, हार्ट अटैक, कैंसर, घुटने बदलवाना, ब्रेन टयूमर जैसी बीमारियों का नाम भी नहीं पता था। नागरिकों को शुद्ध व पौष्टिक भोजन मिलता था। अब खेतों में डाले जाने वाले रसायन फसलों में रमा चुका है, जो आए दिन फल, सब्जी व भोजन के माध्यम सभी रसायन हमारे शरीर में जा रहे हैं। पशुओं का दूध भी जहर बनता जा रहा है। इन रसायनों के कारण ही इस तरह की बीमारियां हो रही है। इसका इलाज प्राकृतिक खेती अपनाकर शुद्ध व पौष्टिक भोजन को अपनाना है। उन्होंने रसायनों के प्रयोग होने वाले बुरे परिणामों को उदाहरण, वीडियो व अन्य माध्यमों से समझाया।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि गुरुकुल में 180 एकड़ में प्राकृतिक खेती की जा रही है। यहां पर किसानों को जीवामृत, जीवाघन, बीजामृत सहित सभी प्रकार की विधियों को विस्तार से प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने कहा कि देशी गाय के 1 ग्राम गोबर में 300 करोड़ से ज्यादा सूक्ष्म जीव होते हैं। गाय रोजाना 10 किलोग्राम गोबर से 30 लाख बैक्टीरिया पैदा करती है। एक देशी गाय से 10 एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती करना संभव है। यदि खेत में केंचुए और सूक्ष्म जीव बढ़ेंगे तो वो खुद ही खेती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि गुजरात की 5 यूनिवर्सिटी में प्राकृतिक खेती को शामिल किया जा रहा है। जहां पर किसानों को लगातार प्राकृतिक खेती में आगे बढ़ाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राकृतिक खेती के साथ किसानों को जोड़ने का चलाया अभियान : श्याम सिंह राणा
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राकृतिक खेती के साथ किसानों को जोड़ने का अभियान चलाया है। हरियाणा प्रदेश के किसान पहले ही प्राकृतिक खेती से जुड़े हुए हैं। रसायनों के प्रयोग से किसान की भूमि की सेहत खराब, अनाज खराब और मनुष्यों की सेहत भी खराब होती जा रही है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग इसको लेकर खूब प्रचार प्रसार कर रहा है। प्रदेश में ऐसे हालात हैं कि पशुओं के चारे के कारण दूध खराब होता जा रहा है। मौजूदा समय में किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की जरुरत है। तभी देश को वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने में प्राकृतिक खेती का अहम योगदान रहेगा।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव बिजेंद्र कुमार ने कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत किया और विभाग की प्राकृतिक खेती को लेकर चलाई गई योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बागवानी विभाग के महानिदेशक डा. अर्जुन सैनी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
इस मौके पर चीफ व्हीप रामकुमार कश्यप, पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा, उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा, पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन, केयूके वीसी सोमनाथ सचदेवा, अतिरिक्त निदेशक रामप्रताप सिहाग, चेयरमैन सुभाष कलसाना, चेयरमैन गुरनाम सैनी, जिलाध्यक्ष तिजेंद्र सिंह गोल्डी, भाजपा वरिष्ठ नेता जयभगवान शर्मा डीडी, पद्मश्री वैज्ञानिक हरिओम, प्राकृतिक खेती वैज्ञानिक बलजीत सिंह सहित अन्य गणमान्य नागरिक, प्रगतिशील किसान भी मौजूद रहे।

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