
कुरुक्षेत्र में गूंजी राजस्थान की लोक गाथा, पंचजन्य नाट्य समारोह में वीर तेजा जी के बलिदान ने दर्शकों को किया भावविभोर।
पंचजन्य नाट्य समारोह का चौथा दिन, कुचामणि ख्याल शैली में जीवंत हुई वीर तेजा जी की सत्यनिष्ठा और वीरता।
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 21 अगस्त : हरियाणा कला परिषद तथा उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) के संयुक्त तत्वावधान में कुरुक्षेत्र के कला कीर्ति भवन (भरतमुनि रंगशाला) में पांच दिवसीय पंचजन्य नाट्य समारोह के चौथे दिन कुचामणि ख्याल लोक नाट्य समिति, नागौर (राजस्थान) के कलाकारों द्वारा नाटक वीर तेजा जी की महानता के किस्से को जीवंत अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। आम्बा लाल नांदला के लेखन और दयाराम भांड के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वच्छ भारत मिशन स्टेट लेवल टास्क फोर्स के उपाध्यक्ष प्रमोद कौशिक ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में भारत विकास परिषद की अध्यक्षा डॉ. ममता सचदेवा, एकल अभियान के संगठन मंत्री राजीव कुमार, कार्यालय प्रभारी सुनीता रानी, भाजपा उपाध्यक्षा शालू यादव और कृष्ण पांचाल आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष महेश जोशी ने सभी अतिथियों का अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया। मंच का संचालन विकास शर्मा द्वारा किया गया। नाटक में राजस्थान के लोक देवता वीर तेजा जी महाराज के जीवन, उनकी सत्यनिष्ठा और सर्वाेच्च बलिदान की गाथा का सुंदर चित्रण किया गया। कलाकारों ने अभिनय के माध्यम से दिखाया कि कैसे तेजा जी ने अपनी परोपकारी भावना का परिचय देते हुए लाछां गूजरी की गायों को डाकुओं से छुड़ाने के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी। गाथा के सबसे मार्मिक प्रसंग में दिखाया गया कि जब तेजाजी गायों की रक्षा के लिए जा रहे थे, तब रास्ते में उन्हें बाषक नाग मिले। तेजाजी ने नाग देवता को वचन दिया कि वे गायों को मुक्त कराकर वापस उनके पास आएंगे। युद्ध में लहूलुहान होने के बावजूद तेजा जी अपना वचन निभाने नाग देवता के पास वापस लौटे। जब नाग देवता ने उनके पूरे शरीर पर घाव देखे और डसने के लिए कोई सुरक्षित स्थान न पाया, तब वीर तेजा जी ने सत्य और वचनबद्धता की मिसाल पेश करते हुए अपनी जीभ आगे कर दी। नाग के डसने से धर्म की रक्षा करते हुए उनका प्राणांत हुआ। इस लोक गाथा ने दर्शकों को सत्य, साहस और जीव-दया का संदेश दिया। कलाकारों के शानदार अभिनय, पारंपरिक वेशभूषा और कुचामणि ख्याल शैली के संगीत ने कुरुक्षेत्र के रंग प्रेमियों को राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया।
संस्कृति के संवाहक हैं लोक नाटक : प्रो. सोमनाथ सचदेवा।
कार्यक्रम उपरांत मुख्य अतिथि प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने दर्शकों को सम्बोंधित करते हुए कहा कि वीर तेजा जी महाराज का जीवन हमें गौ-रक्षा, जीव-दया और सत्यनिष्ठा का सबसे बड़ा पाठ पढ़ाता है। घायल होने के बावजूद केवल अपना वचन निभाने के लिए नाग देवता के पास वापस लौटना उनके सर्वाेच्च बलिदान को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए ऐसे पारंपरिक लोक नाटकों का मंचन बहुत जरूरी है। ये नाटक केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति के सच्चे संवाहक हैं। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि और े कलाकारों को सम्मानित किया गया।


