
स्मृति विशेष: नेकदिली की विरासत और पिता का यश
हरियाणा संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक दूरभाष – 94161 91877
प्रस्तुति – पुत्ररत्न समाजसेवी अशोक रोशा।
हमेशा नि:स्वार्थ जरूरतमंद व्यक्तियों की सेवा में तत्पर (स्वयं एक संस्था)।
कुरुक्षेत्र,26 अप्रैल : जब समाज में मेरी पहचान मेरे नाम से नहीं, बल्कि पिता के मान से करती है, तो अंतर्मन गर्व से सराबोर हो जाता है। पिता श्री ‘रोशा’ जी का आत्मज कहलाना, किसी भी सांसारिक उपलब्धि से कहीं बड़ा पुरस्कार है। यह हर्ष इस बात का नहीं कि मैं जाना जाता हूँ, बल्कि इस बात का है कि मेरे पिता ने अपने सत्कर्मों, शुचिता और निश्छल हृदय से समाज में वह स्थान अर्जित किया है, जहाँ उनका नाम मात्र ही एक ‘सम्मान’ बन गया है।
मैं स्वयं को परम सौभाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे श्री सत्य प्रकाश जी रोशा जैसे देवतुल्य व्यक्तित्व का संरक्षण मिला। जब लोग श्रद्धा भाव से कहते हैं कि ‘ रोशा जी अत्यंत नेक दिल इंसान थे तो वह शब्द मेरे लिए किसी अनमोल थाती (धरोहर) से कम नहीं होते। उनका यश ही मेरा गौरव है और उनके आदर्श ही मेरी असली पूँजी।”
पिता जी ने अपनी सत्यनिष्ठा और नेकदिली से जो सम्मान की विरासत तैयार की है, उसका उत्तराधिकारी होना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। उनकी साख ही मेरा परिचय है और उनका नाम ही मेरा सबसे बड़ा स्वाभिमान।”
“किसी भी पुत्र के लिए इससे बड़ी वसीयत क्या होगी कि उसे उसके पिता के पुण्य कर्मों से पहचाना जाए? श्रद्धेय पिताजी द्वारा अर्जित की गई ‘इज्जत’ और ‘नेकनामी’ ही मेरी वास्तविक पहचान है। पिता जी का साया मेरे जीवन का वो उद्यान है, जिसकी शीतलता मुझे हर कदम पर गौरवान्वित करती है। उनके नाम से जुड़ा होना, मेरे लिए संसार की समस्त दौलत से ऊपर है। उनके चरित्र की सुगंध ही मेरा असली गौरव है।” जन्म जयंती पर नमन।।

