
समीक्षा बैठक में कुलगुरु प्रोफ़ेसर दिनेश कुमार ने कहा कि एसवीएसयू के सभी प्रोग्राम वर्ल्ड जॉब मार्केट को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किए गए हैं।
पलवल,प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 30 मई : श्री विश्वकर्मा स्किल यूनिवर्सिटी ग्लोबल जॉब मार्केट में हिस्सेदारी की रणनीति पर काम कर रही है। जर्मन और जापानी के साथ- साथ इस सत्र में बीवॉक फ्रेंच इसी उद्देश्य से शुरू की गई है। कुलगुर प्रोफेसर दिनेश ने सभी 65 प्रोग्राम की समीक्षा बैठक में बताया कि विदेशों में स्किल्ड लोगों के लिए बड़े अवसर पैदा हो रहे हैं। इसी को देखते हुए श्री विश्वकर्मा स्किल यूनिवर्सिटी ने अपने प्रोग्राम डिजाइन किए हैं। वर्ल्ड जॉब मार्केट में जॉब रेडी स्किल्ड लोगों की भारी कमी है। वैश्विक स्तर पर इन अवसरों को भुनाने के उद्देश्य से ही हमने प्रत्येक विद्यार्थी के लिए एक विदेशी भाषा सीखना अनिवार्य किया है। इस बार हमने फ्रेंच का भी विकल्प दिया है। इस समय दुनिया के 29 देशों में फ्रेंच भाषा का आधिकारिक तौर पर प्रयोग हो रहा है। इसी तरह छह देशों में जर्नम आधिकारिक तौर पर प्रयोग में लाई का रही है। जापान का अपने आप में एक बड़ा कद है। वह एक बड़ी आर्थिक महाशक्ति है और वहां दुनिया के ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स के कई बड़े ब्रांड हैं। इसी तरह जर्मन और फ्रांस में ऑटोमोबाइल क्षेत्र में बड़ी वैश्विक कम्पनियां हैं। जापान में एल्डर केयर की बड़ी मांग है। कुलगुर प्रोफेसर दिनेश कुमार ने बताया कि यूरोप में एग्रीकल्चर फार्म मैनेजर का जॉब रोल बहुत डिमांड में है। इसके लिए श्री विश्वकर्मा स्किल यूनिवर्सिटी ने इस साल से बीएससी एग्रीकल्चर शुरू किया है और डी वॉक और बीवॉक एग्रीकल्चर पहले से चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि दुनिया में एविएशन सेक्टर में बड़ा बूम है और भारत में भी तेजी से नए हवाई अड्डे बन रहे हैं। इसी को देखते हुए बीबीए एयरलाइंस एंड एयरपोर्ट मैनेजमेंट तथा पीजी डिप्लोमा इन एयरपोर्ट ऑपरेशंस एंड मैनेजमेंट शुरू किए गए हैं। एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ इंडिया के साथ एमओयू करके विद्यार्थियों को ऑन द जॉब ट्रेनिंग दिलाई जा रही है। कुलगुरु प्रोफेसर दिनेश कुमार ने कहा कि पूरी दुनिया में मेडिकल और पैरा मेडिकल के क्षेत्र में जबरदस्त मांग है। इसको देखते हुए इस बार बीएससी नर्सिंग, बीएससी फिजियोथैरेपी, डी. फार्मा और बी. फार्मा, बीएससी योगा और बैचलर एंड मास्टर इन मेडिकल लैबोरेटरी साइंस के कोर्स शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी प्रोग्राम की वैश्विक स्तर पर बड़ी डिमांड है। इसके माध्यम से हम वैश्विक जॉब मार्केट में अपनी हिस्सेदारी चाहते हैं, ताकि हमारे विद्यार्थी ग्लोबल जरूरतों को पूरा करें और अधिक धन कमाएं। उन्होंने कहा कि स्किल्ड लोगों के लिए रोजगार की कमी नहीं है। मेकेनिकल इंजीनियरिंग के फील्ड में हमारे पास बड़ी डिमांड है, लेकिन हम इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे। इसलिए अधिक से अधिक युवाओं को स्किल प्रोग्राम के साथ जोड़ कर उन्हें पारंपरिक शिक्षा की बजाय कौशल आधारित शिक्षा और जॉब मार्केट में लाना हमारा लक्ष्य है।


