पंचमी नवरात्रि पर स्कंद माता के रुप में पूजा अर्चना हुई : आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा

कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक 23 मार्च : हार्मनी ऑकल्ट वास्तु जोन, पिपली (कुरुक्षेत्र) के अध्यक्ष तथा श्री दुर्गा देवी मन्दिर, पिपली के पीठाधीश ज्योतिष आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि पचंमी नवरात्र को माँ दुर्गा के पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। भगवान कार्तिकेय को स्कंद भी कहते है । इसलिए माँ दुर्गा को स्कंदमाता भी कहा जाता है।
यह कमल के आसन पर विराजमान हैं, इसलिए इन्हें पद्मासन देवी भी कहा जाता है। इनका वाहन भी सिंह है। इन्हें कल्याणकारी शक्ति की अधिष्ठात्री कहा जाता है। यह दोनों हाथों में कमलदल लिए हुए और एक हाथ से अपनी गोद में ब्रह्मस्वरूप सनतकुमार को थामे हुए हैं। स्कंद माता की गोद में उन्हीं का सूक्ष्म रूप है। इनकी पूजा-अर्चना में मिट्टी की 6 मूर्तियां सजाना जरूरी माना गया हैं।
माँ स्कंदमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनकी उपासना करने से साधक अलौकिक तेज की प्राप्ति करता है। यह अलौकिक प्रभामंडल प्रतिक्षण उसके योगक्षेम का निर्वहन करता है। एकाग्रभाव से मन को पवित्र करके माँ की स्तुति करने से दुःखों से मुक्ति पाकर मोक्ष का मार्ग सुलभ होता है। इनकी आराधना से विशुद्ध चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं।
ट्वीटर के माध्यम से समर्थगुरू धारा, मुरथल हरियाणा के संस्थापक आदरणीय समर्थगुरु सिद्धार्थ औलिया जी ने बताया कि ध्यान के मुख्य 14 लाभ हैं : 1. तनावमुक्ति 2. विचार से मुक्ति 3. विश्राम 4. शांति 5. प्रज्ञा 6. अहोभाव 7. निर्भयता 8. आत्मज्ञान 9. मुक्ति 10. साक्षी 11.तथाता 12.आत्मबल
- सुख 14. आनंद
समस्त विश्व कल्याण हेतु श्री दुर्गा चालीसा का पाठ व संकीर्तन हुआ जिसमें मुख्य यजमान चंपा देवी गुप्ता धर्मपत्नी डॉ. ईश्वर गुप्ता , शिमला धीमान, सुमित्रा पाहवा, सुरेन्द्र कौर,संगीता तलवाड़, ऊषा शर्मा , पायल सैनी , निशा अरोड़ा व भक्त सुशील तलवाड़ ने माँ दुर्गा की भेंटे गायी। श्रद्धा और भक्ति भावपूर्ण भक्तों ने मां दुर्गा के लिए नृत्य किया।
श्री दुर्गा देवी मंदिर के पुजारी पण्डित राहुल मिश्रा ने वैदिक मंत्रोच्चारण से नवग्रह पूजा और मां दुर्गा की अर्चना करवाई। माँ दुर्गा की आरती और कीर्तन के पश्चात सभी भक्तों को श्रद्धा भावना से प्रसाद वितरण किया गया।




