सच्ची श्रद्धा और भक्ति का निर्जला एकादशी में महत्त्व है : डॉ. मिश्रा

हरियाणा संपादक – वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक।
सह संपादक – डॉ. संजीव कुमारी।

कुरुक्षेत्र, 24 जून : श्री दुर्गा देवी मन्दिर के पिपली (कुरुक्षेत्र) के पीठाधीश ज्योतिष व वास्तु आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा के अनुसार गुरुवार 25 जून 2026, स्वाति नक्षत्र,शिव योग और तुला राशि चन्द्रमा में निर्जला एकादशी मनाई जाएगी I सभी एकादशियों में श्रेष्ठ महत्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का है। इसे निर्जला, पांडव और भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। निर्जला एकादशी को भगवान विष्णु के लिए व्रत रखा जाता है। सच्ची श्रद्धा और भक्ति का निर्जला एकादशी में महत्त्व है । मान्यता है इस व्रत से सम्पूर्ण वर्ष की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल मिलता है।
भीमसेनी एकादशी क्यों कहते हैं ?
महाभारत की एक प्रचलित कथा के अनुसार भीम ने एकादशी व्रत के संबंध में वेदव्यास से कहा था मैं एक दिन तो क्या, एक समय भी खाने के बिना नहीं रह सकता हूं, इस कारण से मैं एकादशी व्रत का पुण्य प्राप्त नहीं कर संकूगा। तब वेदव्यास ने ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी के बारे में बताया। उन्होंने भीम से कहा कि तुम इस एकादशी का व्रत करो। इस एक व्रत से तुम्हें सभी एकादशियों का पुण्य मिल जाएगा। भीम ने इस एकादशी पर व्रत किया था, इसी कारण से इसे भीमसेनी एकादशी कहते हैं।
निर्जला एकादशी को क्या करें ?
भगवान विष्णु का मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ” का जाप करना बहुत शुभ होता है।
भगवान विष्णु को पीले रंग के कपड़े, फल और अन्न अर्पित करना चाहिए।
श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी उत्तम होता है।
यदि निर्जला एकादशी का व्रत न भी कर पाएं तो भी अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान अवश्य करें।
गाय सेवा ,जीव जन्तुओं और असहायों की सेवा करें।
गरीबों और ब्राह्मणों को कपड़े, छाता, जूता, फल, मटका, पंखा, शर्बत, पानी, चीनी आदि का दान श्रद्धा पूर्वक करना चाहिए।
निर्जला एकादशी पर क्या नहीं करना चाहिए ?
क्रोध, झूठ और वाद विवाद से दूर रहें।
तुलसी के पत्ते एकादशी को नहीं तोड़ें।
नकारात्मक विचारों और बुरे कर्मों से दूर रहना चाहिए।
तामसिक भोजन, मांस-मदिरा और लहसुन-प्याज का सेवन मत करें।
किसी व्यक्ति का अपमान मत करें और कटु वचन बोलने से बचें।

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