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गीता का ज्ञान सार्वकालिक एवं सर्वदेशीय है : मास्टर जी

भारतीय स्वंत्रता संग्राम मे क्रन्तिकारियो पर गीता के निष्काम कर्म योग का बहुत प्रभाव था : डा. श्रीप्रकाश मिश्र।
मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा वीर अमर क्रांतिकारी खुदीराम बोस की जयंती के उपलक्ष्य मे गीता संवाद कार्यक्रम सम्पन्न।
क्रांतिकारी खुदीराम बोस ने मात्र अठारह वर्ष, आठ महीना एवं आठ दिन की आयु में भारत माता की रक्षा के लिए हसते हसते फांसी के फंदे को चूम लिया।

कुरुक्षेत्र, वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक 03 दिसम्बर : बुधवार
श्रीमदभगवदगीता समस्त कालों में सम्पूर्ण विश्व के लिए प्रासंगिक एवं उपादेय है। गीता का ज्ञान सार्वकालिक एवं सर्वदेशीय है। वर्तमान युग में मानव जीवन के विभिन्न द्वन्द्वों, परिस्थितियों, व्यक्तिगत, सामाजिक, राष्ट्रीय और वैश्विक समस्त समस्याओं का समुचित समाधान भगवद्गीता में अन्तर्निहित है। यह विचार गीता के प्रकांड विद्वान एवं दार्शनिक, मिशन आठ सौ करोड़ के प्रमुख मास्टर जी ने मातृभूमि सेवा मिशन आयोजित अंतराष्ट्रीय गीता जयंती समारोह के उपलक्ष्य में वीर अमर क्रांतिकारी खुदीराम बोस की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित गीता संवाद कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये। गीता संवाद कार्यक्रम का शुभारम्भ मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र एवं मिशन आठ सौ करोड़ के प्रमुख मास्टर जी ने संयुक्त रूप से भारतमाता, योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण एवं वीर अमर क्रांतिकारी खुदीराम बोस के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मास्टर जी ने कहा वर्तमान युग में मानव की समस्या का मुख्य कारण विषयों के प्रति उसकी आसक्ति एवं मोहग्रस्तता है। मनुष्य को प्रतिकूल परिस्थियाँ, दुःख, आकांक्षित विषयभोग प्राप्त न होने की स्थिति में अत्यधिक तनाव तथा मानसिक द्वन्द्व के कारण उसका मनोबल कमजोर हो जाता है। ऐसी स्थिति में वह गलत निर्णय लेता चला जाता है। इन स्थितियों में भगवद्गीता की प्रासंगिकता सिद्ध होती है। गीता में वर्णित धार्मिक सहिष्णुता, निष्काम कर्मयोग, लोकसंग्रह, स्थितप्रज्ञ इत्यादि अनेकानेक सिद्धान्त है जिनकी वर्तमान युग में महती प्रासंगिकता है। मास्टर जी ने मातृभूमि सेवा मिशन के सेवा प्रकल्पों की सराहना की और मिशन के समस्त सेवा कार्यों को श्रीमदभगवदगीता के निष्काम कर्म योग की प्रयोगशाला कहा।
मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा जब जब एवं पर संकट आया एवं देश पराधीन हुआ, तब तब श्रीमद्भगवद्गीता की प्रेरणा के देश के क्रांतिकारियों द्वारा मातृभूमि भारत की रक्षा हुई। ऐसे ही महान देशभक्त एवं भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी खुदी राम बोस थे। जी। जिन्होंने मात्र अठारह वर्ष, आठ महीना एवं आठ दिन की आयु में भारत माता की रक्षा के लिए हसते हसते फांसी के फंदे को चूम लिया। खुदी राम पर गीता के उपदेश का बहुत प्रभाव था। खुदीराम बोस का जन्म 3 दिसंबर 1889 को पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले के मोहोबनी गांव में हुआ था। वे एक साधारण परिवार में चौथे बच्चे थे। जब वे सिर्फ 6 साल के थे, तो उनकी मां और 7 साल की उम्र में पिता का देहांत हो गया। इसके बाद उनकी बड़ी बहन अपरूपा रॉय ने उनका पालन-पोषण किया। ब्रिटिश हुकूमत ने 11 अगस्त 1908 को, स्केल जेल में खुदीराम बोस को फांसी पर लटका दिया गया। डा. मिश्र ने कहा भारतीय स्वंत्रता संग्राम में क्रन्तिकारियो पर गीता के निष्काम कर्म योग का बहुत प्रभाव था। आभार ज्ञापन आचार्य सतीश कौशिक ने किया। मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने मुख्यातिथि मास्टर जी को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र देकर सामनानित किया। मातृभूमि सेवा मिशन आश्रम परिसर पहुंचने पर मास्टर जी का मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने तिलक लगाकर, पुष्पवर्षा कर शंख ध्वनि से आत्मीयता पूर्ण स्वागत किया। कार्यक्रम का समापन शांतिपाठ से हुआ। कार्यक्रम में आरती, डा. राजवीर वत्स, रश्मि, शालिनी, अलका वत्स, मंजीत सिंह, विजय कुमार गुप्ता, उमेश सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहें।

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