
कुरुक्षेत्र, प्रमोद कौशिक/संजीव कुमारी 16 अप्रैल : श्री दुर्गा देवी मन्दिर पिपली, कुरुक्षेत्र के पीठाधीश
वास्तु व ज्योतिष आचार्य डॉ. सुरेश मिश्रा ने बताया कि वैशाख मास की अमावस्या, रेवती नक्षत्र और मीन राशि के चन्द्रमा में 17 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।
जिसे सनातन धर्म में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग दिवाकर के अनुसार, अमावस्या तिथि 16 अप्रैल रात 8 बजकर 12 मिनट से शुरू होकर 17 अप्रैल की शाम 5 बजकर 22 मिनट बजे तक रहेगी। ज्योतिष शास्त्रों और पुराणों के अनुसार सूर्य उदय तिथि के आधार पर 17 अप्रैल 2026 को ही यह अमावस्या मनाई जाएगी।
अमावस्या के दिन , श्रद्धालु भक्त जन विशेष क्या करे ?
भगवान विष्णु की पूजा, स्नान और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ होता है। विशेष भगवान का नाम संकीर्तन और यज्ञ करें। इसके लिए मन में श्रद्धा और भक्ति आवश्यक है।
परम पवित्र तीर्थ स्थान और नदियों में स्नान करने और दान करने से व्यक्ति के पाप समाप्त होते हैं तथा जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
अमावस्या को पितृ तर्पण, स्नान-दान और पूजा-पाठ और विशेष पीपल वृक्ष की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से पीपल वृक्ष 24 घंटे आक्सीजन देते है। अमावस्या के दिन स्नान, दान और पितरों के निमित्त तर्पण का विशेष महत्व बताया गया है।
अमावस्या में किए गए शुभ कार्यों से पितृ प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-शांति, सफलता और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
गौशाला में और आपके आसपास जो गाय मिले या जीव जंतु भी मिले उनकी अन्न, जल और खाद्य पदार्थों से सेवा करें। 84 लाख योनियों में परोपकार केवल मानव ही कर सकता है।


