
रिपोर्टर विपिन राजपूत
ग्रामीण युवाओं को टीबी उन्मूलन अभियान से जोड़ रहा स्वास्थ्य विभाग
रायबरेली, 20 अगस्त 2026।
प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को टीबी उन्मूलन अभियान से जोड़ने के लिए जिला क्षय रोग केंद्र पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनुपम सिंह एवं जिला युवा अधिकारी वर्तिका सिंह की अध्यक्षता में आयोजित प्रशिक्षण में जिला प्रोग्राम समन्वयक अभय मिश्रा, जिला पब्लिक प्राइवेट मिक्स समन्वयक मनीष श्रीवास्तव एवं जिला टीबी-एचआईवी समन्वयक अतुल कुमार ने माई भारत वॉलंटियर्स को क्षय रोग के लक्षण, जांच, उपचार और बचाव से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी।
अनुभवनात्मक शिक्षण कार्यक्रम (ईएलपी) के तहत प्रशिक्षण के तीसरे दिन बुधवार को माई भारत वॉलंटियर्स की टीम को जिला क्षय रोग केंद्र (डीटीसी) स्थित टीबी यूनिट का भ्रमण कराया गया। इस दौरान वॉलंटियर्स को केंद्र के विभिन्न काउंटरों की उपयोगिता, वहां होने वाली जांच तथा मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चंद्रा ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को टीबी उन्मूलन अभियान से जोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने यह पहल शुरू की है। इसके तहत माई भारत वॉलंटियर्स–रायबरेली और जिला क्षय रोग केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। रायबरेली के हरचंदपुर, ऊंचाहार, डलमऊ, शिवगढ़ और अमावां ब्लॉक के चयनित गांवों के युवाओं को अभियान से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही लखीमपुर, बाराबंकी, अयोध्या, इटावा, कन्नौज और वाराणसी के चयनित ब्लॉकों में भी यह पहल शुरू की गई है।
जिला क्षय रोग केंद्र पर 17 से 21 अगस्त तक चल रहे प्रशिक्षण में युवाओं को टीबी के लक्षण, जांच, निदान, उपचार और बचाव की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण के बाद ये युवा अपने गांवों में लोगों को टीबी के प्रति जागरूक करने के साथ संभावित मरीजों की पहचान कर उन्हें जांच और उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में विभाग का सहयोग करेंगे।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनुपम सिंह ने बताया, “टीबी उन्मूलन अभियान में युवाओं की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। चयनित पांच गांवों के 50 युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें टीबी की पहचान, बचाव और उपचार की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण के बाद ये युवा अपने क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने के साथ संभावित मरीजों को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में सहयोग करेंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी की समय से पहचान और उपचार सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।”


